2017 में एनएचएआइ ने जिला कोर्ट में मामला दायर किया था। इसकी सुनवाई चार साल बाद पूरी हुई है। इस दौरान जिला जज ने एनएचएआइ व सरकारी पक्ष को सुनकर आदेश जारी कर दिया है। इसमें जज ने एनएचएआइ की अपील को खारिज कर दिया। इसके बाद किसानों व एनएचआई के मुआवजे की दरों को लेकर किसान तैयार नहीं हुए।
एनएचआई मामले को लेकर हाईकोर्ट चली गई, जहां 22 जुलाई 2024 को कोर्ट ने जिला प्रशासन को दर तय कर मुआवजा देने की बात कही। वर्तमान जिलाधिकारी डॉ.दिनेशचंद्र की पहल पर 10 वर्षो से लटका भूमि अधिग्रहण मुआवजे का रास्ता साफ हो गया। जिस क्रम में 20 गांवों में से सात गांवों का अवार्ड घोषित कर दिया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग 233 से आच्छादित 20 ग्रामों में कुल 71.1423 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा रही है। इस परियोजना में कुल निजी भूमि 759 का कुल रकबा 60.3257 हेक्टेयर प्रभावित है।
उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में जिलाधिकारी द्वारा जून व जुलाई में ग्राम परसौड़ी, परसूपुर, वीरभानपुर, रामगढ़, हरदासीपुर, बिरहदै व फरीदपुर के गांवों के भूमि अधिग्रहण के लिए अवार्ड घोषित कर दिया गया है। अइलिया, आराजी अइलिया, विशुनपुर लेवरूआ, फरीदपुर, रामदेवपुर, विहरदै, चंदवक, बरइछ, परसौड़ी, रामगढ़, खुज्झी, बीरभानपुर, बलुआ, कनौरा, दरदासीपुर, सिधौनी, आराजी बलुआ, परसुपुर, लेवरूआ, गोरखा गांव शामिल हैं।
अजय कुमार अम्बष्ट, एडीएम भू-राजस्व, सक्षम प्राधिकारी भूमि अध्याति ने बताया कि 20 गांवों के मुआवजा के लिए सक्षम प्राधिकारी जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने सुनवाई कर सात गांवों का अवार्ड घोषित कर दिया है। इसकी फाइल शासन स्तर पर भेजी गई थी। इसमें से पांच गांवों के मुआवजे का बजट प्राप्त हो चुका है। अब भुगतान के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है। इससे काश्तकारों को मुआवजा दिया जा सके। तहसीलों में तहसीलदार व लेखपाल के जरिये लोगों की पत्रावलियां भुगतान के लिए मांगी जा रही है।