मीरगंज। थाना क्षेत्र के अगहुआ गांव में दूसरे दिन 17 घंटे बाद कुएं से फायर बिग्रेड की टीम ने बालिका का भी शव निकाला। मायके में आई महिला ने रविवार को दो जुड़वा बेटे और एक बेटी के साथ रविवार शाम पांच बजे कुएं में छलांग लगा दी थी। इस दौरान दो जुड़वा बच्चों का शव घटना के कुछ ही घंटे बाद निकाल लिया गया था, जबकि महिला को गांवों के लोगों ने जिंदा बचा लिया था। रविवार रात आठ बजे पुलिस ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। सोमवार को उसे छुट्टी दे दी गई।
जिला अस्पताल से आई अंतिमा मायके में एक कमरे में अकेली बिस्तर पर गुमसुम पड़ी हुई है। परिवार की अन्य महिलाएं दरवाजे पर रोती-बिलखती मिलीं। संवेदा जताने के लिए गांववाले और नाते-रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है। वह कुछ भी बात करने की स्थिति में नहीं है। वहीं, गांव के लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे थे।
अगहुआ गांव निवासी छोटेलाल प्रजापति की बेटी अंतिमा (32) की शादी करीब छह वर्ष पूर्व सिकरारा थाना इलाके के चकमैथा डमरूआ गांव के सतीश कुमार प्रजापति के साथ हुई थी। रोजी-रोटी के सिलसिले में सतीश मुंबई रहता है। अंतिमा 15 दिन पहले अपने मायके आई थी। रविवार की शाम पांच बजे वह अपने नौ माह के जुड़वा बेटे अनुज और अतुल और बेटी त्रिशा (4) को लेकर घर के दक्षिण तरफ 300 मीटर दूर कुएं में कूद गई थी। रात में आठ बजे सीओ मछलीशहर अतर सिंह की मौजूदगी में पुलिस, फायर ब्रिगेड के जवान और ग्रामीण रात भर त्रिशा के शव की तलाश शुरू की। लेकिन रात साढ़े 11 बजे पाइप छोटी पड़ने के कारण कुएं से पानी निकालने का काम बंद किया गया। इसके बाद, शुक्रवार की सुबह नौ बजे से फिर कुएं से पानी निकलना शुरू किया गया, करीब साढ़े 11 बजे शव उतराया। इसके बाद फायर बिग्रेड के जवानों ने कटिया लगाकर शव को बाहर निकाल और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उधर, घटना की जानकारी मिलने के बाद ससुरालीजन रात में ही आ गए थे। त्रिशा का भी शव मिल जाने के बाद अंतिमा के भाई अनिल प्रजापति और देवर शैलेश प्रजापति ने थाने में संयुक्त रूप से प्रार्थना पत्र दिया। उनके मुताबिक, अंतिमा की दिमागी हालत शादी के पूर्व से ही ठीक नहीं थी। तभी से उसका उपचार चल रहा था। वह किसी तरह की कार्रवाई नहीं चाहते। पुलिस ने हादसा दर्ज कर शव घरवालों को सौंप दिया।
बेटी पर चाकू से कर चुकी थी हमला
मीरगंज। ससुरालजनों के मुताबिक, अंतिमा ने करीब डेढ़ वर्ष पूर्व ससुराल में त्रिशा पर चाकू से हमला कर दिया था। तब वह लगभग ढाई वर्ष की रही होगी। घरवालों की नजर पड़ जाने से लोगों ने त्रिशा को बचा लिया था। उसके हाथ और शरीर में कुछ अन्य स्थानों पर चोट आई थी। इसके बाद उसने एक बार फांसी लगाने की भी कोशिश की थी।
तीनों भाई-बहनों का एक साथ हुआ अंतिम संस्कार
मीरगंज। अगहुआ गांव में मृतक तीन बच्चों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया। जौनपुर के रामघाट में यह दृश्य देख लोगों की आंखें भर आईं। इस मौके पर बच्चों ने घर और ननिहाल पक्ष के लोग मौजूद थे। पूर्व प्रधान दान बहादुर यादव ने बताया कि नम आंखों से तीनों बच्चों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।