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अधूरे मन से किए गए काम से नहीं मिलती वास्तविक संतुष्टि

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जौनपुर। आर्ट आफ लिविंग के प्रांतीय युवा कार्यक्रम समन्वयक अनुराग सिंह ने कहा कि जीवन में खुश रहने के लिए किसी कारण की जरूरत नहीं होती है। खुशी मनुष्य का स्वभाव है। उसे बाहर से लाने की जरूरत नहीं होती है। वह हमारे भीतर मौजूद है।
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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग संस्थान में चल रहे स्टूडेंट एक्सिलेंस लर्निंग प्रोग्राम में शनिवार को उन्होंने छात्रों को खुश रहने और जीवन जीने के तरीके सिखाए गए। उन्होंने कहा कि हमने खुशियों को इच्छाओं की पूर्ति से जोड़ दिए हैं। इसका नतीजा यह है कि किसी इच्छा के पूरी होने पर हम खुशी होती है और उसके तुरंत बाद ही मन उदास हो जाता है। अपने काम को मनोयोग से करें, उसी से संतुष्टि मिलेगी। आर्ट आफ लिविंग की विशेषज्ञ निहारिका ने सुदर्शन क्रिया के बारे बताया। उन्होंने कहा कि सुदर्शन क्रिया से शरीर, मन और भावनाओं में सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने एकाग्रता और तनाव मुक्त तरीके से जीवन जीने के सूत्र बताये।
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