खेत में चार फीट की परिधि में बने गहरे गड्ढे में करीब दस फीट नीचे पानी भरा था। इससे उसकी गहराई का पता नहीं चल पा रहा था। सूचना पर पहुंचे ग्रामीणों ने रस्सी में ईंट बांधकर गड्ढे में डाला तो पता चला कि उसकी गहराई 35 फीट है। मौके पर जुटे लोगों का मानना है कि यहां कभी कुआं रहा होगा, जिसे बाद में पाट दिया गया होगा।
बारिश के चलते मिट्टी बैठ गई। हालांकि मौके मौके पर जुटे 70 से 80 वर्ष के बुजुर्गों को भी यह पता नहीं है कि यहां कभी कुआं रहा था। 60 साल के रामधनी चौहान का कहना है कि इस खेत में उनके पिता जी के समय से खेती हो रही है है। अगर कभी धान की रोपाई के समय इसी तरह जमीन धंसी होती तो हादसा हो सकता था।