सरावां गांव में गिरे पोल को खड़ा करते लाइनमैन। संवाद
जौनपुर। जिले में सोमवार की शाम को आई आंधी और बारिश ने बिजली व्यवस्था को बेपटरी कर दिया है। शहर से गांव तक करीब 27 बिजली के खंभे और दो ट्रांसफॉर्मर गिरने से आपूर्ति बाधित हो गई। कहीं पांच से 10 घंटे तो कई क्षेत्रों में 18 से 24 घंटे बाद भी बिजली नहीं लौट सकी। कई गांवों में मंगलवार की शाम तक आपूर्ति बहाल नहीं होने से लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ा। बिजली निगम की टीमें फॉल्ट तलाशने और क्षतिग्रस्त खंभे-तार ठीक करने में जुटी रहीं। शहर से सटे चांदपुर में सोमवार की शाम को पांच बजे बिजली गुल हुई। मंगलवार को आपूर्ति बहाल नहीं होने से गांव में पानी का संकट बढ़ गया। खुटहन में शाहगंज से आने वाली 33 हजार वोल्ट की मुख्य लाइन के पोल में इंसुलेटर फॉल्ट के कारण करीब 18 घंटे आपूर्ति बाधित रही। बदलापुर के रामनगर फीडर और घनश्यामपुर क्षेत्र में भी 24 घंटे तक बिजली संकट बना रहा। मुफ्तीगंज में लालगंज से आने वाली 132 केवी मुख्य आपूर्ति करीब 20 घंटे की मशक्कत के बाद मंगलवार को बहाल हुई। महराजगंज बाजार के उत्तरी छोर पर 100 केवी का ट्रांसफॉर्मर जल गया। इससे करीब 125 घरों की बिजली प्रभावित हुई।
तेज हवा और बारिश से धान की फसल गिरने का खतरा
जौनपुर। जिलों में पांच अक्तूबर की शाम तेज हवा के साथ हुई बारिश मानसून की विदाई के दौरान मौसम में बदलाव का परिणाम हो सकती है। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, भू-भौतिकी विभाग, बीएचयू वाराणसी के तकनीकी अधिकारी एवं मौसम वैज्ञानिक शिव मंगल सिंह ने बताया कि छह से आठ अक्तूबर तक गरज-चमक के साथ तेज हवा और बारिश की संभावना है। ऐसे में किसानों को अगले एक-दो दिन फसलों पर विशेष निगरानी रखने की सलाह दी गई है। धान की फसल में इस समय दाना भरने और दूधिया अवस्था में है। तेज हवा से फसल गिरने की आशंका है। किसानों को खेत में पानी जमा न होने देने और अनावश्यक सिंचाई से बचने की सलाह दी गई है। भिंडी, कद्दूवर्गीय सब्जियों, पत्तागोभी और फूलगोभी में तैयार फसल की समय से तुड़ाई करें तथा जल निकासी की व्यवस्था रखें। मिर्च में तेज हवा से फूल और छोटे फल झड़ सकते हैं, जबकि अरहर में जलभराव और तेज हवा से फूल-फलियां प्रभावित होने की आशंका है। दुधारू पशुओं को बारिश और तेज हवा से सुरक्षित, सूखे और हवादार स्थान पर रखें। उन्हें पर्याप्त पौष्टिक चारा और साफ पानी उपलब्ध कराएं। मौसम साफ होने तक किसान खेतों में जल निकासी बनाए रखें, अनावश्यक सिंचाई न करें और फसलों की नियमित निगरानी करते रहें।