सिकरारा। शिक्षक नौकरी से मुक्त हो सकता है लेकिन वह सेवा से निवृत्त नहीं होता। खानापट्टी गांव निवासी राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक विजय बहादुर सिंह के साथ तो कम से ऐसा ही है। वे पहले भी पूरे मनोयोग से नौनिहालों की जिंदगी संवारते थे और आज भी इस काम में लगे हैं। बालिकाओं की शिक्षा के लिए उनका योगदान उल्लेखनीय है। इन्होंने न सिर्फ बालिका इंटर कालेज की स्थापना की, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी अध्यापन कार्य कर रहे हैं। अपने खर्च से दस छात्रों को हर साल पढ़ाकर योग्य बनाते हैं।
प्राथमिक विद्यालय ताहिरपुर में 25 वर्ष का सेवा काल पूरा करने के बाद विजय बहादुर सिंह वर्ष जून माह 2012 में सेवानिवृत्त हुए। कुल 41 वर्ष तक शिक्षा जगत में उन्होंने अपनी सेवा दी। अपने कार्यकाल में प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को शारीरिक शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जोड़ा और उनको प्रदेश स्तर पर ख्याति दिलाई। वर्ष 1999 में पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन के हाथों उन्हें राष्ट्रपति सम्मान मिला। प्राथमिक विद्यालय ताहिरपुर में सेवारत रहते हुए ही उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा के लिए वर्ष 2001 में अपने गांव में मां शारदा इंटर कालेज की स्थापना कराई। बालिकाओं की शिक्षा के लिए विद्यालय की स्थापना के पीछे भी एक मार्मिक घटना का जिक्र सामने आता है। ताहिरपुर परिसर में ही राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल भी संचालित होता था। वर्ष 1998 में इस विद्यालय से आठवीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुकी एक छात्रा उदास होकर विजय बहादुर सिंह के पास पहुंची और कहा कि उसे इस बात का दुख है कि वह आगे की पढ़ाई नहीं कर सकेगी। क्योंकि गांव में आगे की शिक्षा प्राप्त करने का साधन नहीं है। क्षेत्र में जो विद्यालय हैं भी वह काफी दूर हैं। विजय बहादुर सिंह ने छात्रा को भरोसा दिलाया कि वे कुछ न कुछ प्रबंध जरूर करेंगे। मान्यता प्राप्त विद्यालय से रजिस्ट्रेशन करा कर परीक्षा भी दिलवाई।
मां शारदा इंटर कालेज खानापट्टी की स्थापना की। बालिकाओं के लिए संचालित इस विद्यालय से पढ़कर छात्राएं देश प्रदेश में जिले का नाम रोशन कर रही है। विद्यालय की हाईस्कूल व इण्टर की तीन छात्राओं को इस वर्ष प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लखनऊ में अपने हाथों से सम्मानित किया। इससे पहले भी अमर उजाला द्वारा आयोजित मेधावी छात्र सम्मान में कई बार लखनऊ में मुख्यमंत्री ने कई छात्राओं को सम्मानित किया है। विद्यालय की छात्राओं को राज्यपाल राम नाईक व जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधियों ने भी सम्मानित किया है। सेवानिवृत्त होने के बाद भी श्री सिंह नियमित रूप से इस विद्यालय में आकर छात्राओं को पढ़ाते हैं। साथ ही साथ प्रति वर्ष विद्यालय की 10 गरीब छात्राओं की पढ़ाई का खर्च खुद उठाते हैं।