जौनपुर। नैनो साइंस की दखल जीवन के हर क्षेत्र में हो गई है। नैनो साइंस पर शोध से दवा, फूड प्रोसेसिंग और उद्योग के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन होने की उम्मीद है। इस क्षेत्र में रोजगार काफी संभावनाए हैं। पूर्वांचल विश्वविद्यालय आगामी सत्र से नैनो टेक्नोलाजी शोध संस्थान शुरू करने की तैयारी में है। बस शासन से हरी झंडी मिलने का बस इंतजार है।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय में नैनो साइंस अध्ययन केंद्र में शोध से आम उपयोगिता की बेहतरीन वस्तुओं का निर्माण हो सकेगा। नैनो साइंस से प्रभावी दवाओं का निर्माण करना संभव है। ऐसे धागे और कपड़े का निर्माण संभव है जो मौसम के अनुकूल व्यवहार करें। फसलों की सुरक्षा के लिए सिल्वर के नैनो पार्टिकिल बनाकर बड़ी संख्या में बैक्टिरियां का सफाया करना संभव हो पाएगा। फूड प्रोसेसिंग में क्रांतिकारी परिवर्तन आएंगे। कृषि उत्पादों को अधिक समय तक उपयोग के लायक बनाया जा सकेगा। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति राम नाईक ने नैनो साइंस एवं तकनीकी शोध संस्थान का शिलान्यास किया था। शोध संस्थान स्थापित होने के बाद देश के गिने चुने विश्वविद्यालयों में पूर्वांचल विश्वविद्यालय भी शुमार हो जाएगा।
नैनो साइंस आयोजित हुई कार्यशाला
जौनपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर में नैनो साइंस एवं तकनीकी विषय पर सितंबर माह में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था, जिसमें देश के तमाम वैज्ञानिकों ने इस विषय पर मंथन कर नैनो साइंस एवं तकनीकी शोध संस्थान के स्थापना की बात की रखी थी। नैनो साइंस शोध एवं तकनीकी संस्थान की स्थापना होने से छात्रों के लिए किसी भी क्षेत्र में काम करना आसान हो जाएगा।
नैनो विज्ञान भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान समेत विज्ञान की विभिन्न शाखाएं जुड़ी हैं। इसमें परमाणु एवं अणुओं के सूक्ष्म स्तर पर कार्य किया जाता है। सुरक्षा, कृषि पर्यावरण, पैकेजिंग, मृदा सुधार, ऊर्जा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सूचना एवं संचार जैसे तमाम क्षेत्रों में नैनो तकनीक से क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। नैनो तकनीकी संस्थान विश्वविद्यालय में शोध की एक नई दिशा तय करेगा।-प्रो. राजाराम यादव कुलपति पूविवि जौनपुर