मड़ियाहूं। स्थानीय क्षेत्र के मीठेपार गांव में बिना निर्माण कराए सात लाख रुपये डकार लेने के मामले में जांच अधिकारी मामले को मैनेज करने में जुट गए हैं। इसका उदाहरण यह है कि उनके जाने के बाद निर्माण कार्य मौके पर शुरू हो गया है। जबकि भुगतान मई माह में ही कर लिया गया था।
भाजपा नेता समशेर सिंह ने डीएम को अवगत कराया कि मीठेपार गांव में मनरेगा के तहत नाद चन्नी और यूरिन टैंक निर्माण के नाम पर एक लाख 29 हजार मजूदरी और 5 लाख 70 हजार रुपये मैटेरियल के नाम पर पैसा निकालकर घोटाला कर लिया गया है। इस शिकायत पर डीएम सर्वज्ञ राम मिश्रा ने जांच के लिए जिला सेवायोजन अधिकारी राजीव कुमार को भेजा। जांच अधिकारी मौके पर उसी जेई को लेकर गए जिसने फर्जी एमबी किया था। यही नही उन्होंने मौके पर कहा कि जल्दी से निर्माण करा लीजिए मुझे डीएम को रिपोर्ट देनी है। इसी के बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया है। वैसे इस मामले की शिकायत प्रभारी मंत्री रीता बहुगुणा जोशी से भी हुई थी। उन्होंने से सीडीओ को जांच के लिए कहा था लेकिन मामले को सीडीओ दबा गए। इससे यही लगता है कि पूरा महकमा लूट खसोट में मिल जुलकर लगा हुआ है। बिना काम कराए जब सात लाख का भुगतान करने की यह स्थिति है तो करोड़ों घोटाले की क्या होगी। वैसे भी जिले में मनरेगा की जांच हो तो करोड़ों का घोटाला सामने आएगा। डीएम सर्वज्ञ राम मिश्रा का कहना है कि अगर निर्माण शुरू हुआ होगा तो भी गलत है। जांच रिपोर्ट के बाद केस दर्ज कराया जाएगा। अगर जांच अधिकारी पक्षपात करते हैं तो दूसरे से जांच कराई जाएगी।