कालपी। 48 घंटे में यमुना के जलस्तर में चार मीटर से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बुधवार शाम से गुरुवार शाम तक जलस्तर 94.62 मीटर से बढ़कर 99.01 मीटर तक पहुंच गया। हालांकि, शुक्रवार को सुबह से इसमें गिरावट दर्ज की गई और शाम पांच बजे तक जलस्तर 98.83 मीटर रहा। अचानक बढ़ने से नदी के किनारे की सब्जी की खेती प्रभावित हो गई है। हालांकि अधिकारी इसकी वजह पहाड़ों में हुई भारी बारिश को मान रहे हैं।
यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से तीन मीटर अभी दूर है। खतरे का निशान 102 मीटर पर है। पिछले वर्ष जलस्तर 108 मीटर तक पहुंच गया था। इससे क्षेत्र के 30 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। इस बार फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तटीय खेतों में पानी भरने से सब्जियों की खेती को लगभग 25 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। नगर के तरीबुल्दा, शेखपुर बुल्दा और आस-पास के गांवों में तुरई, लौकी, करेला जैसी सब्जियों की फसलें जलमग्न हो गई हैं।
किसानों का कहना है कि अगर जलस्तर में दोबारा तेजी आई, तो शेष फसलें भी बर्बाद हो जाएगी। तरीबुल्दा निवासी अनिल, उमाशंकर, राम सिंह, नेपाल, राम उजागर आदि किसानों ने बताया कि जलस्तर रातों-रात बढ़ गया। इससे कछवारी (सब्जी की बेलों की खेती) में पानी भर गया। अनिल ने कहा कि अभी तक 25 प्रतिशत नुकसान हो चुका है, अगर पानी और बढ़ा तो सब कुछ खत्म हो जाएगा।
सव्जियों के दाम में भारी उछाल
यमुना में जलस्तर बढ़ने का असर बाजार में भी दिखने लगा है। एक ही दिन में तुरई 20 से बढ़कर 40 रुपये किलो हो गई है, जबकि लौकी और करेला में भी 10–20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। यमुना किनारे लगभग 70 से 80 किसान सब्जी उगाते हैं और रोजाना 12–14 टन तक सब्जी बाजार में भेजी जाती है। अब सब्जियों की आपूर्ति दूसरे जिलों से होगी। इससे कीमतें और बढ़ सकती हैं।
पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बारिश से यमुना में जलस्तर बढ़ा है। अब जलस्तर में तेजी नहीं है, स्थिति सामान्य हो रही है और घबराने की आवश्यकता नहीं है।
- रूपेश कुमार, प्रभारी, केंद्रीय जल आयोग