उरई। ब्रिटिश शासनकाल से लेकर आजाद भारत तक मजदूर संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, लेकिन धीरे-धीरे विभिन्न कारणों से उनकी ताकत कमजोर होती गई। अधिकारों के लिए मजदूरों को एकजुट होना होगा। यह बात वरिष्ठ नेता कैलाश पाठक ने मजदूर अधिकारों को लेकर आयोजित विचार गोष्ठी में कही।
वरिष्ठ पत्रकार केपी सिंह ने कहा कि नोएडा में मजदूरों के साथ हुए व्यवहार और कम मजदूरी पर काम कराने की घटनाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने इसे स्वतंत्र भारत के लिए कलंक बताया। वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा ने कहा कि अंग्रेजी शासनकाल में भी मजदूर संगठन मजबूत थे, लेकिन आजादी के बाद विभिन्न सरकारों के दौर में इन्हें कमजोर किया गया। पूर्व विधायक कप्तान सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से विरोधी दलों के लोगों को परेशान किया जा रहा है।
पूर्व विधायक संतराम कुशवाहा ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर का उद्देश्य था कि मजदूर, दलित और कमजोर वर्ग को शोषण से मुक्ति मिले, संविधान आधारित व्यवस्था स्थापित हो।गोष्ठी में सीपीआईनेता रामसिंह, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी श्याम सुंदर, रेहान सिद्दीकी, देवेंद्र शुक्ला , राज पप्पन, सुधीर अवस्थी अादि मौजूद रहे।