प्रदेश टीम के अधिकारी जांच करते हुए।
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उरई (जालौन)। प्रदेश सरकार की ओर से आई विशेष टीम ने दूसरे दिन गुरुवार को भी बुंदेलखंड पैकेज से हुए कार्यों की जांच की। निरीक्षण में नहर विभाग से लेकर जल निगम एवं अन्य विभागों के कार्यों में खामियां ही खामियां मिलीं। इलाकाई लोगों ने भी हकीकत बयां कर दी। हर काम के निरीक्षण में जांच दल की भ्रकुटियां तनी रहीं। साफ था कि बुंदेलखंड पैकेज का सही इस्तेमाल नहीं किया गया है। विकास के जो कार्य हुए, उनमें ज्यादातर मानक के मुताबिक नहीं हैं। अधिकारियों और ठेकेदारों की जुगलबंदी ने पैकेज की धनराशि का बंदरबांट कर लिया है।
चार दिन के दौरे पर जिले में आई इस टीम की रिपोर्ट प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र को भेजी जानी है। टीम का नेतृत्व नियोजन विभाग के वरिष्ठ शोध अधिकारी डा. नागेंद्र यादव कर रहे हैं। टीम ने गुरुवार को नहर विभाग के कार्यों का निरीक्षण किया। गोहन मार्ग पर नहर का तरसौल रजबहे में एक करोड़ 10 लाख के बजट से हुए लाइनिंग का कार्य देखा। इसमें टीम को ईंटें उखड़ी मिलीं। इसके अलावा नहर में सफाई भी नहीं दिर्खी। इंट के टुकड़े व कंकरीट भी रजबहे में पड़े मिले। टीम ने जब पूछा कि रजबहे से कितने किसानों को फायदा पहुंच रहा है तो विभागीय जेई व एई कोई जवाब नहीं दे पाए।इसके बाद टीम माधौगढ़ रजपुरा के बीच से निकले रजबहे का लाइनिंग कार्य देखने पहुंची। 2.5 किमी का कार्य एक करोड़ के बजट से किया गया है। यहां पर भी टीम को संतोषजनक कार्य नहीं मिला।
हालांकि नापने पर रजबहे की चौड़ाई सही मिली। यहां पर साइड में दरारें दिखाईं दीं। इसके अलावा रजबहे में ईट व कंकरीट बड़ी मात्रा में मिला। कई जगह पक्के रजबहे में मिट्टी भी मिली, जिससे उसमें घास उग आई थी। इस पर टीम ने असंतोष जताया। जांच टीम ने शेखपुर बुजुर्ग में पैकेज से बिजली विभाग के भी कार्य देखे। यहां पर भी टीम को खामियां नजर आईं। दूसरी टीम ने बुंदेलखंड पैकेज से बनाए गए चेकडैम को चेक किया। टीम ने निरीक्षण के दौरान किसी भी जिला स्तरीय अधिकारी को अपने साथ नहीं रखा। अलग-अलग टीम के निरीक्षण से विभागीय अधिकारी परेशान दिखे। दफ्तरों में बैठे अधिकारी जेई व एई से रिपोर्ट लेते रहे।