पत्नी की हत्या के बाद खुद को आग लगाई
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उरई (जालौन)। किरायेदार के दुकान खाली न करने और इसकी शिकायत पर पुलिस की चुप्पी से क्षुब्ध युवक ने पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली। 65 फीसदी जले युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसकी हालत गंभीर है। सिटी मजिस्ट्रेट पीके सक्सेना, एएसपी शकील अहमद, सीओ जंगबहादुर सिंह ने जिला अस्पताल पहुंचकर युवक के बयान लिए और उसे भरोसा दिया कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शहर कोतवाली के मुहल्ला तुलसीनगर निवासी सुदेश गोयल (35) के नाम जिला परिषद पर दुकान नंबर 41 आवंटित है। उसने पांच साल के लिए दुकान रज्जन नामक व्यक्ति को किराये पर दी थी। 20 जून को अवधि पूरी होने पर भी रज्जन ने दुकान खाली नहीं की तो उसने पंचायत बुलाई जिसमें सभासद पवन गेंड़ा भी मौजूद रहे। पंचायत में रज्जन ने आठ दिन की मोहलत मांगी। इस पर सुदेश राजी नहीं हुआ और बुधवार को एसपी को प्रार्थनापत्र दिया। इस पर कोतवाली पुलिस को जांचकर कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। पुलिस के कार्रवाई न करने पर सुदेश गुरुवार शाम कोतवाली पहुंचा तो कोतवाल आलोक सक्सेना नहीं मिले। इस पर सुदेश कोतवाली के सामने पेट्रोलपंप पर पहुंचा और वहां से बोतल में 20 रुपये का पेट्रोल लेकर अपने ऊपर उड़ेल लिया और मच्छर चौराहे पर खुद को आग लगा ली। आग का गोला बनकर दौड़ा सुदेश सीओ कार्यालय के सामने गिर पड़ा। पुलिस ने उसे तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया।
घटना के बारे में सभासद पवन गेंडा ने बताया कि वह विकास भवन में पीस कमटी की बैठक में शामिल थे, तभी सुदेश ने फोन पर बताया कि रज्जन से बात हो गई है। वह रविवार को दुकान खाली कर देगा। इसके बाद भी सुदेश ने आग क्यों लगाई, उन्हें जानकारी नहीं है। सभासद ने बताया कि रज्जन ने कुछ सामान दुकान से हटा भी लिया है। इस बाबत एसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वह खुद सिटी मजिस्ट्रेट को लेकर जिला अस्पताल गए थे। यहां उन्होंने सुदेश ने बयान दिए कि उसने जिला पंचायत अध्यक्ष से शिकायत की थी। एसपी ने दावा किया कि सुदेश ने पुलिस से कोई शिकायत नहीं की थी। वैसे भी दुकान खाली करवाना सिविल मैटर है। पुलिस का मैटर नहीं है, इसलिए पूरे मामले से पुलिस का कोई सरोकार नहीं है।