माधौगढ़ स्थित सूखा तालाब दिखाता युवक।
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सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड के लोगों को पीने के पानी के लाले पड़े हैं। गर्मी बढ़ने और पारा चढ़ने के साथ ही प्राकृतिक जल स्रोत, तालाब, कुएं आदि सूखने लगे हैं। जमीन का जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है। इससे लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं। नहरों में भी पानी नहीं छोड़ा गया। इससे मवेशियों की हालत खराब है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गर्मी
को देखते हुए तालाबों को समय से भरा जाए। माधौगढ़ में कुल 141 तालाब हैं। इन सभी को नहर से भरा जाता है, लेकिन मौजूदा समय में ये सभी सूखे पड़े हैं। इनसे उड़ रही धूल इस बात को स्पष्ट करती है कि शासन प्रशासन अभी उस वक्त का इंतजार कर रहा है, जब जानवर मरने लगें और अकाल सी स्थिति पैदा हो जाए। दूसरी ओर तेजी से नीचे सरकते भूगर्भ जल स्तर
के कारण नगर व ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों हैंडपंप भी पानी छोड़ चुके हैं। गौरतलब है कि हर साल मवेशियों के लिए नहरों में खैराती पानी छोड़ा जाता है ताकि उससे गांव गिरांवों के पोखर तालाब और तलैयों में पानी भरा जा सके। इस बार अब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है। नहरें सूखी पड़ी हैं और तालाबों में भी धूल उड़ रही है। प्यास के मारे जानवरों के हलक सूख
रहे हैं और वे तालाबों में गड्ढों में जमा कीचड़ में प्यास बुझाने की कोशिश कर रहे हैं।
भरे जाएं तालाब
माधौगढ़ निवासी अखिलेश सविता, विमल सिंह कैलोर, अरविंद सिंह आदि का कहना है कि गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन को तालाबों को भरे जाने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि आम जनता केे साथ साथ जानवरों को भी सहूलियत मिल सके।
वर्जन
जल्द ही अधिकारियों को निर्देशित कर तालाबों को भरवाया जाएगा ताकि लोगों के साथ साथ जानवरों को भी पानी की समस्या से दो चार न होना पडे़। यदि कर्मचारी इसमें लापरवाही दिखाते हैं तो कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -प्रेमचंद्र यादव, एसडीएम, माधौगढ़