उरई। तिहरे हत्याकांड में शामिल दो लोगों को कोर्ट ने नौ साल चले ट्रायल के बाद हत्या के सबूत मिटाने में दोषी पाया है। गुरुवार को दोनों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई। दोषियों पर 40-40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
झांसी जिले के मोहल्ला खंडेराव गेट नंबर 2 निवासी बबलू ने शहर कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें बताया था कि उसकी बहन अभिलाषा तिवारी व बहनोई सुरेंद्र तिवारी मोहल्ला विजय नगर उरई में रहते थे। वह दो दिन से बहन को फोन लगा रहा था। उनका फोन नहीं उठ रहा था। 21 नवंबर 2016 को वह बहन के मकान में पहुंचा तो देखा उसके गेट पर ताला लगा है। उसने मकान के बगल में बने बाड़े से झांककर देखा तो उसके बहन, बहनोई और भांजे कार्तिक खून से लथपथ पड़े थे।
बबलू की सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। बबलू ने बताया था कि बहन के लड़के नितिन की मौत हो गई थी। इसके बाद ससुराल की अंजनी, ससुर ओमबाबू व एक अन्य ने अभिलाषा को नितिन की हत्या में फर्जी तरीके से फंसा दिया था। इसका मामला कोर्ट में विचाराधीन था। यह लोग उसकी बहन से सुलह के नाम पर 20 लाख रुपये और मकान की मांग करते थे। न मानने पर बहन व बहनोई को जान से मारने की धमकी देते थे। इसमें नितिन की पत्नी नेहा तिवारी भी शामिल थी। इन्हीं लोगों ने बहन अभिलाषा, बहनोई सुरेंद्र तिवारी और भांजे कार्तिक की कुल्हाड़ी व हंसिया से हत्या कर दी है।
पुलिस ने नेहा, अंजनी, ओमबाबू व एक अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस को विवेचना में एफआईआर में लिखे चार लोगों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला था। इस पर पुलिस ने विवेचना से उनके नाम हटा दिए थे। विवेचना के दौरान ग्वालियर निवासी सोनू यादव व बृजेश पटेल का नाम सामने आया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया था। उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
कोर्ट में चले ट्रायल के बाद गुरुवार को सुनवाई पूरी हुई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर विशेष न्यायाधीश डॉ. अवनीश कुमार ने हत्या के आरोप से दोष मुक्त कर दिया। हत्याकांड में सबूत मिटाने के मामले में दोषी पाते हुए सोनू यादव व ब्रजेश पटेल को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। दोनों पर चालीस-चालीस हजार रुपये जुर्माना लगाया है।