उरई। चिटफंड कंपनी के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले दो कर्मचारियों को कोर्ट ने मंगलवार को सात-सात साल की सजा सुनाई है। दोनों साढ़े सात-साढ़े सात हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। दोनों पर 25 से अधिक मामले दर्ज हैं। दोनों जेल में हैं।
उरई कोतवाली क्षेत्र के कुकरगांव निवासी शरीफ खान ने पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें बताया था कि वर्ष 2016 में कपिल चिटफंड कंपनी में पॉलिसी जमा करने का काम करता था। पॉलिसी खुलवाने पर कमीशन मिलता था। उसी में उसने भी करीब लाखों रुपये फिक्स कर दिए थे।
कंपनी की देखरेख नई दिल्ली के द्वारिका मोड़ निवासी अमनदीप व मध्य प्रदेश के सहारनपुर निवासी करुणेश शर्मा करते थे। जब उसने अमनदीप और करुणेश से जमा की गई पॉलिसी मांगी तो इन लोगों ने उसके साथ धोखाधड़ी कर कंपनी की डुप्लीकेट पॉलिसी पकड़ा दी।
उसने जब हेड ऑफिस में पता किया तो उसको जानकारी हुई के यह पॉलिसी फर्जी है। किसी भी तरीके से प्रमाणित नहीं है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली। पुलिस ने दोनों को दो अगस्त 2016 को कोतवाली क्षेत्र से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
दोनों आरोपियों के खिलाफ 18 अगस्त 2016 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। सोमवार को सुनवाई पूरी हुई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच जिरह, गवाहों के बयान सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे ने दोनों को दोषी पाते हुए सजा सुनाई। दोनों के खिलाफ 25 से अधिक मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसमें कई में सजा भी हो चुकी है।