उरई। विशेष न्यायाधीश डकैती चंद्र मोहन चतुर्वेदी की अदालत ने 20 वर्ष पुराने रंगदारी, घर में घुसकर मारपीट, धमकी और तोड़फोड़ के मामले में दो दोषियों को पांच वर्ष तक के कारावास और अर्थदंड सुनाया है। मामले के तीसरे अभियुक्त की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो जाने से उसके विरुद्ध कार्रवाई पहले ही समाप्त कर दी गई थी।
कोंच कोतवाली क्षेत्र के तिलक नगर निवासी उषा कुशवाहा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 19 फरवरी 2007 की रात करीब नौ बजे मनोज, अशोक और सुनील उसके घर पहुंचे। आरोप था कि तीनों ने ढाई लाख रुपये की रंगदारी मांगी, तमंचा दिखाकर जान से मारने की धमकी दी, घर में घुसकर मारपीट की तथा फर्नीचर और बिजली की वायरिंग में तोड़फोड़ की। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया था कि तीनों क्षेत्र में दबंग प्रवृत्ति के होने के कारण लोग उनके खिलाफ गवाही देने से डरते थे।
विवेचना के बाद पुलिस ने मनोज और अशोक के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। बाद में पीड़िता के प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत वर्ष 2010 में सुनील को भी अभियुक्त के रूप में तलब किया। विचारण के दौरान 2 जुलाई 2014 को अशोक की मृत्यु हो जाने पर उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने मनोज और सुनील को दोषी करार देते हुए धारा 387 आईपीसी में पांच वर्ष का कारावास व दो-दो हजार रुपये अर्थदंड, धारा 452 में चार वर्ष का कारावास व 1,500-1,500 रुपये अर्थदंड, धारा 323 में एक वर्ष का कारावास व एक-एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 506 में दो वर्ष का कारावास व 500-500 रुपये अर्थदंड तथा धारा 427 में दो वर्ष का कारावास व दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।