उरई। भूमि संरक्षण विभाग में रिटायर्ड कर्मचारियों के नाम से चिकित्सा प्रति पूर्ति की रकम रिश्तेदारों के खाते में डालने के मामले में बुधवार को उप कृषि निदेशक व भूमि संरक्षण अधिकारी ने दो लिपिकों के खिलाफ कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। दोनों को जांच में दोषी पाए जाने पर निलंबित भी कर दिया गया है।
अभी तक 15 लाख रुपये की घपले की पुष्टि हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि यह रकम अभी बढ़ सकती है। फिलहाल कार्रवाई से विभाग सहित अन्य में खलबली मची हुई है। डीएम ने मामले में तीन सदस्यीय टीम को लगाया था। जिस पर यह खुलासा हुआ है। टीम की जांच अभी चल रही है।
भूमि संरक्षण विभाग (राष्ट्रीय जलागम) कार्यालय में तैनात रहे पूर्व अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम से यहां तैनात कर्मचारियों ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति के फर्जी बिल बनाए और बिलों को विभागीय प्रक्रिया के तहत पास दिखाया गया और भुगतान आदेश जारी कर दिए गए।
राशि संबंधित कर्मचारियों के खातों में न जाकर उनके कथित रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई। मामला जनता दर्शन में जब जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय के पास पहुंचा तो उन्होंने इसकी एडीएम संजय कुमार की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच करवाई। इसमें सामने आया है कि पूर्व भूमि संरक्षण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के नाम पर भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति का बिल बनाकर करीब 90 हजार का भुगतान करा दिया गया है जबकि उन्होंने ऐसा कोई दावा प्रस्तुत नहीं किया है।
इसी प्रकार सेवानिवृत्त कर्मचारी मैयादीन और शिवराम पाल के नाम से भी करीब तीन लाख से अधिक के फर्जी बिल तैयार कर भुगतान निकाल लिया गया। संबंधित कर्मचारियों का कहना है कि न तो उन्होंने कोई आवेदन किया और न ही उन्हें कोई राशि प्राप्त हुई। अब तक की जांच में करीब आठ लोगों के नाम पर करीब 15 लाख रुपये की पुष्टि हो चुकी है।
इनके खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट
जानकारी के बाद उप कृषि निदेशक एसके उत्तम व भूमि संरक्षण अधिकारी अभिषेक चंद्रा ने वरिष्ठ सहायक कार्यालय भूमि संरक्षण अधिकारी श्यामजी व कनिष्ठ सहायक सहायक कार्यालय उपकृषि निदेशक हर्ष वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। जांच समिति बैंक खातों की पड़ताल कर रही है। जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी भी जांच की जा रही है। फिलहाल दोनों लिपिकों को निलंबित कर दिया गया है।
यह नाम अभी तक हो चुके उजागर
भूमि संरक्षण विभाग में फर्जी बिल बनाकर चिकित्सा प्रतिपूर्ति की लाखों रुपये की सरकारी रकम को हड़पने के मामले में सामने आया कि भुगतान तो सेवानिवृत्त कर्मचारी मइयादीन के नाम से दिखाया गया, लेकिन रकम उमेश कुमार के खाते में पहुंची। इसी तरह पूर्व भूमि संरक्षण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के नाम की रकम उमेश कुमार के खाते में भेज दी गई। कैलाशी देवी नाम को दिखाकर संजीव कुमार के खाते में धनराशि भेजी गई है। राज नारायण के खाते में भी धनराशि भेजी गई है।
कई विभागों की मुहर अपने पास बनवाकर रखी गई थी
जांच में आया कि कर्मचारी रिटायर्ड कर्मचारियों का डाटा एकत्र करते थे। इसके बाद पूरी फाइल को तैयार किया जाता था। भुगतान में कोई गड़बड़ी न हो, इस पर आरोपी कई संबंधित विभागों की मुहर को भी बनवाकर अपने पास रखते थे।
कोषागार व स्वास्थ्य विभाग से फाइल कैसे हुईं पास
उरई। भूमि संरक्षण विभाग में हुए घपले में सामने आया कि 50 हजार से अधिक रकम की फाइलें पास होने के लिए कई पटलों से होकर गुजरती हैं। इसमें स्वास्थ्य विभाग व मुख्य रूप से कोषागार है। इसके बाद भी यह खेल कैसे हो गया, यह सवाल लोगों के मन में गूंज रहा है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल हुआ है। कर्मचारियों के खाते में लगातार उनकी पेंशन जा रही है तो प्रतिपूर्ति की रकम दूसरों के खातों में कैसे भेज दी गई। (संवाद)
जानकारी पर डीएम ने सभी खातों निकासी पर लगवाई रोक
जनता दर्शन में जब जिलाधिकारी को जानकारी मिली कि भूमि संरक्षण विभाग में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है तो उन्होंने इसकी टीम बनाकर जांच करवाई। इसकी पुष्टि हुई तो उन्होंने चिट्टी लिखकर सभी खातों में निकासी पर रोक लगवा दी।
वर्जन
डीडी कृषि व भूमि संरक्षण अधिकारी की तहरीर पर दोनों लिपिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच की जा रही है।
राजीव कुमार शर्मा, सीओ सिटी
फोटो - 03 लिपिक श्यामजी की फोटो।- फोटो : जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते कांग्रेस पदाधिकारी।