कोंच (जालौन)। कोतवाली क्षेत्र के सिमिरिया गांव में तीन बीघा जमीन के विवाद में दो सगे भाइयों ने शुक्रवार को जहर खा लिया। एक भाई की मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई, जबकि छोटा भाई जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
बताया गया कि जहर खाने वाले सुरेंद्र और भंवर सिंह पांच भाई हैं। बड़े भाई माता प्रसाद के दामाद रामकिशोर ने इनके पिता भिरई अहिरवार से तीन बीघा भूमि अपने नाम करा ली थी। इसी को लेकर विवाद चल रहा था। रामकिशोर शुक्रवार को अपनी साली की शादी में आया था। उसको देखने के बाद झगड़ा हो गया। इसी के बाद दोनों भाइयों ने जहर खा लिया। वहीं, घटना के बाद से परिवार के सदस्य घर में ताला लगाकर मंदिर में शादी करने के लिए चले गए।
जानकारी के अनुसार, कोतवाली क्षेत्र के सिमिरिया गांव निवासी स्व. भिरई अहिरवार के पांच बेटे माता प्रसाद अहिरवार, देवीदीन, छोटेलाल, सुरेंद्र व भंवर सिंह अहिरवार हैं। माता प्रसाद, देवीदीन और भंवर सिंह मानसिक रूप से कमजोर बताए जाते हैं। भंवर सिंह अविवाहित हैं। भिरई के पास 20 बीघा भूमि थी। इसमें से सात बीघा बेटों के नाम कर दी थी और जीवित रहते हुए तीन बीघा जमीन बड़े बेटे माताप्रसाद के दामाद रामकिशोर निवासी ग्राम सिकरी राजा थाना कोटरा के नाम कर दी थी। भाई इसका विरोध करते हैं जबकि बड़े भाई माताप्रसाद अपने दामाद के पक्ष में हो गए। वहीं, चार अन्य भाइयों का माता प्रसाद के दामाद से विवाद चलने लगा। विवाद न्यायालय तक पहुंच चुका है।
शुक्रवार की सुबह सुरेंद्र (48) और उनके साथ रह रहे छोटे भाई भंवर (45) ने विषाक्त पदार्थ खा लिया। कुछ देर बाद जब उनकी तबीयत बिगड़ी तो परिजनों को जानकारी हुई। परिजन दोनों को कोंच के सीएचसी ले गए, जहां से दोनों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। हालत गंभीर देख जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज में सुरेंद्र की मौत हो गई। भंवर सिंह अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। इसकी जानकारी होते ही सीओ डॉ. देवेंद्र कुमार पचौरी, कोतवाल विजय कुमार पांडे पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और मामले की जानकारी ली।
उधर, शुक्रवार को बड़े भाई माता प्रसाद की छोटी बेटी निशा की शादी होनी थी। इसकी तैयारियां चल रही थीं। मौत की खबर के बाद घर में मातम छा गया। घर के बाहर हो रही सजावट उखाड़ दी गई। निशा की बारात जिला झांसी के गुरसरायं थाना क्षेत्र के ग्राम सिया से आनी थी। निशा की शादी बैरागढ़ धाम से कराई जा रही है। परिजनों ने बताया कि सुरेंद्र विवाहित थे, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं है।
कोरोना के समय भिरई ने कर दी थी जमीन नाम
बड़े लड़के छोटेलाल ने आरोप लगाया कि कोरोना काल के दौरान उनके बड़े भाई का दामाद रामकिशोर एक दिन घर पहुंचा और उनके पिता को पेंशन निकलवाने के बहाने ले गया। इसी दौरान उसने अपने नाम वसीयत करा ली। एक साल बाद जब जानकारी हुई तो पिता का निधन हो चुका था। छोटेलाल ने बताया कि उन्होंने वाद भी दायर किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा दामाद ने उनके ऊपर ही कार्रवाई करवा दी। वह चार साल से दर दर की ठोकर खा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बताया कि गुरुवार को न्यायालय में मामले की तारीख थी। दोनों भाई तारीख से आए थे, लेकिन कोई हल नहीं निकलने पर सुरेंद्र और भंवर ने जहर खा लिया।
गुरुवार की देर रात हुआ था विवाद
ग्राम सिमिरिया में पारिवारिक भूमि विवाद पिछले तीन साल से चल रहा है। गुरुवार को दामाद रामकिशोर घर पर आ गया तो देर रात छोटे के पुत्र वीरू और दामाद रामकिशोर में कुछ विवाद हुआ। इस दौरान वीरू ने बहनोई के शरीर में ब्लेड मारने का आरोप गया। सूचना पर पहुंची यूपी 112 पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया और कोतवाली ले गई। पुलिस दोनों से मामले को लेकर पूछताछ कर रही है। सुबह करीब आठ बजे सुरेंद्र और भंवर सिंह ने विषाक्त पदार्थ खा लिया।
दामाद ने ससुर के पिता की सेवा कर तीन बीघा जमीन करा ली अपने नाम
बताया जाता है कि माता प्रसाद के दामाद रामकिशोर ने चार-पांच साल पहले सिमिरिया गांव में रखकर ससुर के पिता भिरई की सेवा की। इस दौरान 10 बीघा में से बची हुई तीन बीघा भूमि अपने नाम करा ली। दामाद रामकिशोर के नाम जमीन होने के बाद भिरई के चार बेटे देवीदीन, छोटेलाल, सुरेंद्र और भंवर सिंह इसका विरोध करने लगे। विवाद के चलते दामाद ने कुछ दिनों बाद सिमिरिया गांव छोड़कर अपने गांव सिकरी व्यास चला गया। इस बीच मामला कोर्ट में पहुंच गया। शुक्रवार को रामकिशोर अपनी साली की शादी में आया था। उसको देखकर घर में विवाद शुरू हो गया। इसी के चलते सुरेंद्र और भंवरसिंह ने विषाक्त पदार्थ खा लिया।
-
पारिवारिक भूमि विवाद में दोनों भाइयों ने जहर खाया है। एक की हालत गंभीर बनी हुई है। मामले की जांच की जा रही है।
- डॉ. देवेंद्र पचौरी, सीओ कोंच