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Jalaun News: मौत के बाद सिस्टम की नींद टूटी

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उरई। जिले में दो दिन के भीतर एक महिला और एक मासूम की मौत ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों मामलों में जांच बैठा दी गई है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पतालों में अनियमितताएं पहले से मौजूद थीं तो जिम्मेदार विभाग की नजर उन पर समय रहते क्यों नहीं पड़ी। सीएमओ कार्यालय के अनुसार जिले में 53 अस्पताल पंजीकृत हैं। हकीकत में इससे कहीं अधिक निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हैं। बिना मानकों और नवीनीकरण के संस्थान आखिर किसकी निगरानी में चल रहे थे। स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर अभियान चलाने और शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने का दावा करता है लेकिन हालिया घटनाएं यह संकेत देती हैं कि व्यवस्था की सक्रियता अक्सर किसी हादसे के बाद ही दिखाई देती है।
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इलाज में लापरवाही से जान जाने का आरोप

एट क्षेत्र के वर्ध गांव की सावित्री (26) को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल के समीप स्थित न्यू कमला हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बेटे को जन्म देने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन का आरोप है कि उपचार में लापरवाही बरती गई। हालत गंभीर होने पर उन्हें झांसी रेफर किया गया लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की गई है।

पॉली क्लीनिक की जगह चल रहा था नर्सिंग होम
शहीद भगत सिंह चौराहे स्थित अनिका हॉस्पिटल में चार वर्षीय रियाज की मौत के बाद जब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो कई अनियमितताएं सामने आईं। जिस संस्थान का पंजीकरण पॉली क्लीनिक के रूप में था, वहां ऊपरी मंजिल पर अवैध रूप से नर्सिंग होम संचालित किया जा रहा था। जांच में पांच बेड मिले जबकि संस्थान का नवीनीकरण भी नहीं कराया गया था। मौके पर प्रदर्शित चिकित्सक का नाम और पंजीकरण में दर्ज नाम भी अलग पाया गया। इसके बाद अस्पताल को सील कर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई।
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