फोटो - 09 खेत में पीली पड़ने लगी गेहूं की फसल। संवाद
उरई। जिले में फरवरी के दूसरे सप्ताह में ही मौसम ने करवट ले ली है। एक सप्ताह में अधिकतम तापमान में पांच डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका असर गेहूं की फसल पर पड़ने लगा है।
वर्तमान में अधिकतम तापमान 27 डिग्री और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है, जबकि एक सप्ताह पहले अधिकतम 22 और न्यूनतम 12 डिग्री सेल्सियस था। दिन में तेज धूप और गर्म हवाओं जैसे हालात से लोगों को समय से पहले गर्मी का एहसास होने लगा है। दोपहर के समय बाजारों और सड़कों पर चहल-पहल कम दिखाई दे रही है। लोग हल्के कपड़े पहनने लगे हैं और ठंड से बचाव के इंतजाम लगभग खत्म हो गए हैं। सुबह-शाम हल्की ठंडक के बावजूद दिन में तपिश बढ़ने से मौसम का संतुलन बिगड़ता नजर आ रहा है।
मौसम में इस बदलाव का सीधा असर खेतों पर पड़ रहा है। किसानों के अनुसार गेहूं की फसल में पीलापन दिखने लगा है। खासकर उन खेतों में जहां समय पर सिंचाई नहीं हो पा रही है। कृषि जानकारों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल दाना बनने की अवस्था में होती है, जिसमें ठंडा और संतुलित मौसम अनुकूल माना जाता है। तापमान में अचानक वृद्धि से दाने सिकुड़ने और पैदावार घटने की आशंका बढ़ जाती है।
कृषि विभाग के अनुसार किसानों को हल्की सिंचाई कर खेतों में नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है। साथ ही खेतों की नियमित निगरानी और आवश्यकतानुसार पोषक तत्वों का छिड़काव करने की भी जरूरत बताई जा रही है, ताकि फसल पर गर्मी का असर कम किया जा सके।
वर्जन
आने वाले दिनों में तापमान में और उतार-चढ़ाव संभव है। ऐसे में किसान और आमजन दोनों को बदलते मौसम के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। - विस्टर जोशी, कृषि वैज्ञानिक।