फोटो 1- सरसौखी की गोशाला। संवाद
- कान्हा गोशाला के पीछे 60 से 70 लाख की लागत से बनेगा नया शेड, 150 नंदियों की होगी क्षमता
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। गोवंश संरक्षण के लिए कान्हा गोशाला के पीछे अलग से नंदीशाला बनाए जाने की योजना है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। नंदीशाला के निर्माण में करीब 60 से 70 लाख रुपये खर्च होंगे।
पालिका सरसौखी स्थित कान्हा गोशाला का संचालन करती है। यहां गाय और सांड़ दोनों को रखा गया है। जगह की कमी अक्सर मवेशियों में टकराव हो जाता है। कई बार नंदियों और गायों को गंभीर चोटें भी आईं। घटनाओं को देखते हुए पालिका ने अब गाय और नंदी को अलग रखने का निर्णय लिया है। इसके लिए नंदीशाला निर्माण का प्रस्ताव शासन से मांगा गया था।
पालिका अध्यक्ष गिरजा चौधरी और ईओ राम अचल कुरील ने बताया कि नगर पालिका चाहती है कि एक बार जो प्रस्ताव शासन को भेजा जाए, वह हर हाल में पास हो। नंदीशाला निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पहले इसका अनुमानित बजट लगभग 40 लाख रुपये था, लेकिन मौका मुआयना के बाद पालिका के इंजीनियरों ने नया नक्शा तैयार किया। अब अनुमानित लागत 60 से 70 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
गोशाला में इस समय लगभग दो सौ गोवंश हैं। पालिका कर्मचारियों का कहना है कि जब सांड़ और गाय एक ही जगह रहते हैं तो देखभाल में मुश्किल आती है। कई बार नंदी बाहर निकल जाते हैं, जिससे ग्रामीणों और किसानों को परेशानी होती है। यदि अलग नंदीशाला बन जाती है तो इन समस्याओं से बड़ी राहत मिलेगी। पालिका सूत्रों का मानना है कि अगर प्रस्ताव जल्दी पास हो गया तो अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत तक नंदीशाला का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा।
जिम्मेदार बोले-दो-तीन दिन प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा
ईओ राम अचल कुरील ने बताया कि प्रस्ताव दो दिन में अंतिम रूप लेकर शासन को भेजा जाएगा। पालिका अध्यक्ष गिरजा चौधरी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप ही काम हो रहा है। नगर पालिका यह सुनिश्चित करेगी कि नंदीशाला में किसी भी प्रकार की कमी न रह जाए।
नंदीशाला में ये सुविधाएं होंगी
नंदीशाला में 150 नंदियों को रखने की क्षमता होगी। उनके लिए अलग-अलग शेड बनाए जाएंगे। भूसे और चारे को रखने के लिए अलग आवास होगा। पानी पिलाने की पुख्ता व्यवस्था होगी। नंदियों की सेहत की जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य कक्ष बनाया जाएगा। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। नियमित सफाई और अपशिष्ट प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।