जिला कारागार के शौचालय में बंदी ने फंदा लगाकर की खुदकुशी
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। जिला कारागार में पॉक्सो एक्ट के आरोप में निरुद्ध 26 वर्षीय बंदी मनोज की मौत के पीछे पारिवारिक विवाद और जमीन बिकने की सूचना को लेकर गहरा सदमा एक अहम वजह मानी जा रही है। जेल सूत्रों के मुताबिक, दो दिन पहले उससे मिलने आए उसके गांव के एक परिचित ने बताया था कि जेल जाने के बाद उसके हिस्से की जमीन उसके भाई ने बेच दी है।
बताया जा रहा है कि इस सूचना के बाद से वह काफी परेशान और अवसादग्रस्त नजर आ रहा था। सहबंदियों के अनुसार वह पिछले दो दिनों से चुप-चुप रहता था और किसी से अधिक बातचीत नहीं कर रहा था। शनिवार दोपहर शौचालय जाने के बाद जब काफी देर तक बाहर नहीं आया तो ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों ने दरवाजा खुलवाया। अंदर वह गमछे के सहारे फंदे पर लटका मिला।
जेल प्रशासन ने उसे तत्काल नीचे उतारकर उपचार की तैयारी की, लेकिन अस्पताल ले जाने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद कारागार परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूत्रों का कहना है कि जेल जाने के बाद परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। आरोपी तीन भाइयों में सबसे छोटा था और गांव में पुश्तैनी जमीन में उसका भी हिस्सा था। जमीन बिकने की जानकारी मिलने के बाद वह मानसिक रूप से टूट गया था। हालांकि, आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह क्या रही, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। कारागार प्रशासन ने घटना की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी है। नियमानुसार मजिस्ट्रियल जांच और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है।
पीडि़ता से रचाई थी शादी, बाद में दर्ज हुई थी प्राथमिकी
मृतक युवक ने वर्ष 2024 जुलाई में कालपी कोतवाली क्षेत्र की एक नाबालिग किशोरी को अपने साथ ले जाकर मंदिर में शादी कर ली थी। बताया गया कि वह उसे साथ रखा था। किशोरी के पिता ने जब बेटी के गायब होने पर कोतवाली में तहरीर दी, तब पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज किया। करीब छह माह बाद किशोरी को बरामद कर न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय में दिए गए बयान में किशोरी ने युवक पर दुष्कर्म और जबरन साथ रखने का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने मामले में पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं बढ़ाते हुए आरोपी को 15 मार्च 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।