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Jalaun News: सुबह की ट्रेन शाम को आई, 10 घंटे करना पड़ा इंतजार

Mon, 17 Mar 2025 12:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
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उरई। नाम दिया गया है त्योहार स्पेशल ट्रेन, लेकिन इनके आने-जाने का कोई समय नहीं है। हालत यह है कि स्पेशल ट्रेनें सुबह के बजाय शाम को आ रही हैं। यात्रियों को आठ से दस घंटे तक स्टेशन पर ट्रेनों का इंतजार करते गुजारना पड़ रहा है। रविवार को त्योहार स्पेशल ट्रेनें 10 घंटे से ज्यादा देरी से आईं।
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होली के त्योहार के बाद नौकरीपेशा लोगों को वापस काम धंधे पर लौटना है। ऐसे लोगों को आने जाने में दिक्कत न हो इसलिए रेलवे ने होली स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। लेकिन इन ट्रेनों में सभी को सीट नहीं मिल पा रही है। किसी तरह सीट मिल भी गई तो ट्रेन समय से नहीं आ रही है। वहीं, जनरल के टिकट पर यात्रा करने वालों की और परेशानी है। जनरल कोच ठसाठस भरे रहते हैं। इन कोचों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही है। फिर भी लोग इसमें यात्रा कर रहे हैं।
झांसी-कानपुर रेलखंड पर गोरखपुर की ओर से आने वाली होली स्पेशल ट्रेन रविवार को 10 घंटे से अधिक देरी से आई। गोरखपुर से मुंबई जाने वाली ट्रेन नंबर 05325 निर्धारित समय सुबह 07.18 बजे के बजाय शाम को 5.26 बजे 10 घंटे 8 मिनट देरी से आई। गोरखपुर से महबूबनगर जाने वाली स्पेशल ट्रेन नंबर 05303 साढ़े पांच घंटे देरी से आई। गोरखपुर से हैदराबाद जाने वाली ट्रेन नंबर 07076 डेक्कन एक्सप्रेस निर्धारित समय से 7.30 घंटे देरी से आई। इस वजह से यात्रियों को खसी परेशानी हुई। स्टेशन अधीक्षक एसके खरे ने भी माना कि रविवार को ट्रेनें देरी से आईं।
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स्लीपर बसों का वसूला जा रहा मनमाना किराया
जालौन। नगर से होकर प्रतिदिन करीब एक दर्जन स्लीपर बसें चलती हैं। यह बसें दिल्ली, जयपुर, अजमेर, गुरुग्राम, मध्यप्रदेश आदि स्थानों के लिए जाती हैं। इनका संचालन मानकों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। यही नहीं किराया भी मनमाना वसूला जा रहा है। मानक के अनुसार इन बसों के लिए स्टैंड होना चाहिए, जोकि नहीं है। यह बसें जगह-जगह सवारियों को उतारती और बैठाती रहती हैं। त्योहार से पहले और बाद में इनका किराया मनमाने ढंग से बढ़ा दिया जाता है। होली से पहले तक इन बसों का दिल्ली का किराया 1200 से 1400 रुपये तक था। होली से पहले व बाद में कामकाजी लोग लौट रहे हैं तो इनका किराया 2000 से 2200 रुपये तक कर दिया गया है। किराया बढ़ाने की कोई शिकायत करता है तो यह रौब झाड़ते हैं। दिल्ली से आने वाली स्लीपर बसों में व्यापार के लिए सामान लाया जाता है। इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। (संवाद)
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