ग्रामीण इलाकों में व्याप्त पेयजल संकट।
- फोटो : amar ujala
कदौरा के ग्राम बबीना स्थित श्मशान घाट पर लगा हैंडपंप महीनों से खराब पड़ा है। इससे अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस दौरान लोगों को हाथ-पैर धोने के लिए भी पानी मिलना मुश्किल हो जाता है तो फिर पीने के पानी की कौन कहे। ग्रामीण राजकुमार, शैलेंद्र सिंह, बब्लू आदि का कहना है कि क्रिया कर्म के बाद उन्हें ऐसे ही घरों को लौटना पड़ता है। श्मशान घाट से बाहर निकलकर जब बोतल खरीदते हैं तब कहीं प्यास बुझती है।
घाट के पास ही बाल्मीकि आश्रम भी है। यहां भी रोजाना आने जाने वाले भक्तों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है। आश्रम के पुजारी बद्री प्रसाद की मानें तो हैंडपंप पिछले 8 माह से खराब पड़ा है। कई बार शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यहीं हाल पूरे गांव का है, यहां करीब 100 हैंडपंप लगे हैं लेकिन कोई छोटी सी कमी के कारण बंद पड़ा है तो कोई रीबोर का इंतजार कर रहा है। ग्राम प्रधान गौरव उपाध्याय का कहना है कि जल्द ही इन हैंडपंपों को ठीक कराया जाएगा।
गर्मी का पारा चढ़ने के साथ ही जालौन तहसील के ग्रामीण इलाकों में भूगर्भ जलस्तर भी तेजी से गिरता जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में लगे अधिकांश हैंडपंपों ने पानी का साथ छोड़ दिया है। इससे वहां पानी का संकट बना हुआ है। ग्रामीणों को इंतजार है कि कब इन हैंडपंपों की मरम्मत होगी और कब उन्हें पानी मिलना शुरू होगा। जालौन के खनुआ, सुढ़ार, औरेखी, उदोतपुरा, देवकी आदि एक दर्जन गांव में देखने को हैंडपंपों की भरमार है, लेकिन पानी देने वालों की संख्या आधे से भी कम है। ऐसे में ग्रामीणों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। कोई रिक्शे से तो कोई साइकिल से पानी ढो रहा है।
उदेतपुरा के धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि कुछ दिन पहले हैंडपंप सुधारने वाले आए भी थे, लेकिन जलस्तर गिरने की बात कहते हुए हाथ झाड़कर लौट गए। उरगांव निवासी श्याम सिंह का कहना है कि सुना था कि गांव-गांव पाइप लाइन बिछेगी, अभी तक कोई शुरूआत नहीं हुई है। लगता नहीं है कि इस बार गर्मी में पेयजल संकट से निजात मिल पाएगी। एसडीएम भैरपाल सिंह का कहना है कि जल्द ही खराब हैंडपंप की सूची तैयार कर उनकी मरम्मत कराई जाएगी।