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पेयजल संकट पर मंथन से निकले समाधान के मोती

Sun, 25 Feb 2018 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूूराे जालाैन
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जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक करती मंत्रियों की टीम। - फोटो : amarujala
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 बुंदेलखंड की 19 में से एक भी विधानसभा ऐसी नहीं थी कि जहां पर पानी संकट न हो। किसी ने हैंडपंप का दुखड़ा सुनाया तो कोई रीबोर हैंडपंपों की भरमार से परेशान था। बताया कि पानी की टंकिया तो है लेकिन कुछ बंद पड़ी है, कुछ निर्माणाधीन तो कुछ से आज तक पानी की एक बूंद भी लोगों को नसीब नहीं हुई। शहर की तरह ग्रामीण इलाकों से भी पेयजल की समस्या मंत्रियों की टीम के सामने आई। समस्याओं को सुनकर टीम ने भी सभी जिलों को कुछ न कुछ सौगात देने का प्रयास किया।

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खड़ी फसल पर नहीं कटेंगे नलकूप कनेक्शन
मंत्रियों की टीम ने दो शब्दों में बिजली विभाग के अधिकारियों से कहा कि बकायेदारी पर किसानों के कनेक्शन काटने से पहले देखा जाए कि बकायेदार की फसल खेत पर खड़ी तो नहीं है। यदि खड़ी फसल पर कनेक्शन कटा और किसान को सिंचाई में कोई दिक्कत हुई तो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बेहतर होगा कि फसल कटने के बाद किसान से वसूली की जाए।

नगर के हैंडपंपों के लिए मिले 3 करोड़
उरई के सदर विधायक गौरीशंकर ने बताया कि मंत्रियों की टीम ने जनपद के नगरों की पेयजल दशा सुधारने के लिए फिलहाल 3 करोड़ की धनराशि देने की बात कही है। इससे खराब पड़े हैंडपंपों और रीबोर होने वाले हैंडपंपों को ठीक कराने में खर्च किया जाएगा।
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 साल भीतर खराब हुए हैंडपंप तो होगी एफआईआर
मंत्रियों ने बताया कि इंडिया मार्का हैंडपंप की एक साल की गारंटी होती है। यदि इस बीच खराब होने वाले हैंडपंपों को ठीक नहीं कराया गया तो कार्यदायी संस्था के खिलाफ इस बार एफआईआर तक दर्ज कराई जाएगी। इसलिए प्रशासन के अधिकारी इस पर विशेष ध्यान दें।

 70 मीटर से कम होगी हैंडपंपों की दूरी
अभी तक दो हैंडपंपों के बीच 70 मीटर की दूरी होती है। माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन ने इस दूरी को कम करने की मांग की ताकि लोगों को दूरदराज की बजाए आसपास ही पीने का पानी उपलब्ध हो सके। इस पर टीम ने हामी भरते हुए कहा कि जल्द ही इस दूरी को भी घटाया जाएगा।

गर्मी से पहले दुरुस्त हो टैंकर व्यवस्था
टीम के मंत्रियों ने कहा कि जहां पर पानी की सप्लाई नहीं है, वहां टैंकरों की मदद ली जाए। इससे पहले अधिकारी देखें कि उनके पास कितने टैंकर है, और कितने काम नहीं कर रहे हैं। सभी तो ठीक कराकर गांव के कोने कोने तक पानी पहुंचाने के काम में तेजी लाई जाए।

महोबा और झांसी सर्वाधिक प्यासे
बैठक में सवाल जवाब के बाद सामने आया कि बुंदेलखंड में सबसे अधिक पेयजल की समस्या महोबा और झांसी में है। झांसी के गुरसराय में गर्मी के अलावा सर्दियों में भी लोगों को पेयजल की किल्लत से जूझना पड़ता है। टीम ने दोनों जगहों की समस्या जल्द ही खत्म कराने की बात कही है।

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