उरई में उर्स में कलाम पढ़ते फनकार
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बजरिया में चल रहे दो दिवसीय सरकार गैबू शाह उर्स का रविवार की रात समापन हो गया। दूसरे दिन गैर प्रांतों से आए कव्वालों व फनकारों ने अपने अपने कलाम पढ़कर समां बांध दिया। रात भर लोगों की भीड़ उर्स में जुटी रही। हजरत सैयद गैबू शाह का सालाना उर्स कुल शरीफ की फातिहा के साथ हो गया। कुल शरीफ की फातिहा में हजरत गाजी मंसूर अली शाह
बेरी वाले बाबा के खादिम हाजी सत्तार बाबा ने रबतआला से दुआ की, कि वलियों सूफियों के फैज का दरिया जारी रहे। अमनों अमान, इंसानियत की फिजा में खूब तरक्की करे। दूसरे शब की वज्मे कव्वाली पहली वज्म के मुकाबिल ज्यादा संजीदा और सुकून वाली रही। इसमें मजमा भी खूब बढ़ गया था। फनकार अजीम नाजा ने बेहतअंदाज में कलाम पेश किया। उन्होंने
पढ़ा, मस्तानों के रेले में, दस रोज के मेले में, दिन इतने सुहाने थे खुश सारे दीवाने थे। जब खत्म हुआ मेला आंखों में नमी छाई, ख्वाजा से बिछड़ने की जिस वक्त घड़ी आयी। इसके बाद फनकार मुराद आतिश ने भी हिंदुस्तान के बादशाह ख्वाजा मुईनउद्दीन चिश्ती की शान में कलाम पढ़ा, ये खुश नसीबी है मेरे ख्वाजा, मेरे तस्सबुर में आ रहे हैं। नजर की मेराज हो रही है,
वो अपना जलवा दिखा रहे हैं। उर्स के समापन पर कमेटी के अध्यक्ष इरशाद अहमद टिंकू व कोषाध्यक्ष जब्बार अंसारी ने कमेटी सहयोगियों व अन्य लोगों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर समाजसेवी शबाब हुसैन, जलील मंसूरी, विजय चौधरी, ताबिश अंसारी, तारिक खान आदि मौजूद रहे।