बुंदेलखंड में दैवी आपदाओं के दंश से पीड़ित किसानों का दर्द जानने के
बहाने सियासत करने का फंडा कोई नया नहीं है। कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष
राहुल गांधी बुंदेलियों के हमदर्द बनकर सामने आए जरूर लेकिन किसानों और
बेरोजगारों की झोली में हर बार कोरे आश्वासन डाल गए। वर्ष 2008 में डकोर
क्षेत्र के सिकरी व्यास गांव पहुंचे और पंप कैनाल से सिंचाई की व्यवस्था को
दुरुस्त करने व क्षेत्र में फैक्ट्री स्थापित कराने का भरोसा दिया। तब
उनकी सरकार थी और फिर भी वायदे पूरे नहीं हुए। अब जब उनकी सरकार नहीं है तो
वह किसानों के जख्मों पर क्या मरहम लगाएंगे यह देखने वाली बात होगी।
गौरतलब हो कि कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को
महोबा जनपद में किसानों के दर्द को जानने पहुंचे थे। बुंदेलखंड में
किसानों
पर जब भी कोई विपदा आई राहुल उनके जख्मों पर मरहम लगाने जरूर आए। वर्ष
2008 में राहुल डकोर विकास खंड क्षेत्र के सिकरी व्यास गांव में आए थे।
यहां चौपाल लगाकर किसानों का दुख दर्द जाना और बेतवा नदी में सला घाट पर
पंप कैनाल बनवाने की घोषणा की थी। इससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की
सुविधा मिल सके। इससे किसान खुश थे कि अब उन्हें
सिंचाई के लिए परेशान नहीं
होना पड़ेगा लेकिन उनका ये वादा हवाई साबित हुआ। सिकरी व्यास गांव में
चौपाल के माध्यम से ही क्षेत्र की बेरोजगारी दूर करने के लिए एक फैक्ट्री
जल्द स्थापित कराने की बात कही थी। आश्वासन को आठ साल बीत गए
लेकिन
फैक्ट्री तो छोड़िए नाम के लिए फाइल तक तैयार नहीं हो पाई। इसके अलावा जनता
की मांग पर पचनद के विकास की भी बात कही लेकिन सब वादे कोरे कागज की तरह
साबित हुए। यह उस समय हुआ जब केंद्र में कांग्रेस की सत्ता थी और यूपी फतह
के लिए राहुल गांधी तैयारी कर रहे थे।