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लॉकडाउन के उल्लंघन में फंसने पर बना रहे ‘दस बहाने’

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चुर्खी बाईपास चौराहे पर बाइक का चालान काटते ट्रैफिक कर्मी। - फोटो : ORAI
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उरई। लॉकडाउन के दिन उन लोगों पर कितने भारी गुजर रहे हैं, जो कभी एक दिन भी घर पर नहीं बैठते थे। कभी बाइक से दोस्तों के घर तो कभी चौराहे की पंचायत और कभी चाय की दुकान पर जोर जोर की बहस, लेकिन अब सब कुछ तो लाकडाउन हो गया। पैर घर से बाहर निकलने को फड़फड़ा रहे हैं और मन भी मोहल्ले के बाहर का नजारा देखने को मचल रहा है पर तभी पुलिस का एनाउंसमेंट कानों में सुनाई पड़ता है तो फिर से बाइक की चाभी खूंटी पर टंग जाती है। इसके बाद भी कुछ ऐसे बिरले हैं, जिन्हें अपनी समझदारी पर काफी भरोसा है और वे घर पर अभी आ रहे हैं, कहकर निकल तो रहे हैं तो लेकिन कभी पुलिस के चंगुल में फंसकर थाने पहुंच रहे हैं तो कहीं पुलिस से जान छुड़ाकर पसीना पोंछते हुए घर लौटते हैं। रिपोर्टर ने जब दरोगा और सिपाहियों से ऐसे लोगों के बारे में बात की तो उनके एक से एक बहाने सामने आए, प्रस्तुत है, उसी पर आधारित एक रिपोर्ट-
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केस-1-सर, बस मम्मी को दवा देनी थी
दरोगा योगेश पाठक ने बताया कि दो दिन पहले ही माहिल तालाब के पास दोपहर के तीन बजे एक बाइक पर सवार दो युवकों को रोका तो एक बोल पड़ा कि मम्मी की दवा लेने निकले हैं, लेकिन न तो दवा का कोई पर्चा था और न ही कोई नाम ही बता पा रहा था, बहाना समझते देर न लगी और फिर उन्हें कोतवाली ले जाकर बाइक का चालान करना पड़ा।
केस-2-भाई साहब, पास ही बहन का घर है
कोतवाली के ही सिपाही ने बताया कि लड़के ही नहीं बड़ी उम्र के लोग भी झूठ बोलने से बाज नहीं आ रहे हैं। शनिवार दोपहर जेल रोड पर बाइक सवार अधेड़ को रोका तो बोले वे रहने वाले रामनगर के हैं, यहां मंदिर के पीछे बहन के घर जा रहे थे। जब उनके साथ बहन के घर के लिए चल दिए तो उनका झूठ खुला तो हाथ पैर जोड़ने लगे। फिर हिदायत देकर छोड़ ही दिया।
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केस-3-दूध वाला नहीं आया तो क्या करें, सर
कोतवाली के एक सिपाही ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शाम पांच बजे के आसपास चुर्खी बाईपास पर स्कूटी सवार युवक को रोका तो तपाक से जवाब मिला कि दूध वाला नहीं है, सो पैकेट वाले दूध की दुकान तलाश रहे हैं, साहब। आप कहो तो वापस जाए, चालान की क्या जरूरत। सुनकर हंसी भी आई, फिर चेतावनी देकर छोड़ ही दिया।
200 से अधिक मामले दर्ज- एएसपी
अपर पुलिस अधीक्षक डॉ अवधेश सिंह ने बताया कि लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन कराया जा रहा है, उल्लंघन के 11 दिनों में 200 से अधिक मामले भी दर्ज किए जा चुके हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे बिना काम के घरों से बाहर न निकले। बेवजह भी पुलिस किसी को परेशान नहीं कर रही है।
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