संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। अचानक बढ़े तापमान ने गेहूं की फसल पर असर डालना शुरू कर दिया है। तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से खासतौर पर देर से बोई गई गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है। तेज धूप के कारण पौधे सिकुड़ने लगे हैं और किसानों को उपज कम होने की चिंता सताने लगी है।
किसानों का कहना है कि तीन बार सिंचाई करने के बाद भी गेहूं के पौधों की पत्तियां दोपहर में सिकुड़ने लगती हैं और दाना कमजोर पड़ने की आशंका बन रही है। ऐसे में किसानों के चेहरों पर मुस्कान की जगह चिंता साफ दिखाई दे रही है।
जिले में सबसे ज्यादा गेहूं की खेती की जाती है, इस बार कई किसानों ने हरी मटर की फसल की तुड़ाई के बाद खेतों में गेहूं की बुआई की थी। इसी कारण यह फसल समय से कुछ देर से बोई गई। अब अचानक बढ़ते तापमान का सबसे ज्यादा असर इसी फसल पर पड़ रहा है।
जिले के कोंच, कालपी , माधौगढ़, उरई के किसान राजू, महाराज, तुलसीराम, महेश, टीकम और हाकिम सिंह ने बताया कि देर से बोई गई गेहूं की फसल बढ़ते तापमान के कारण ठीक से बढ़ नहीं पा रही है। दोपहर के समय पौधों की पत्तियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे उपज कम होने की आशंका है।
किसानों का कहना है कि जिन खेतों में गेहूं की बुआई समय से हुई थी, वहां भी तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण पत्तियों के झुलसने के लक्षण दिखाई देने लगे हैं।
कृषि वैज्ञानिक विस्टर जोशी ने किसानों को सलाह दी है कि जो गेहूं की फसल देर से बोई गई है, उसमें समय-समय पर सिंचाई करते रहें और खेत में नमी की कमी न होने दें। उन्होंने बताया कि बढ़ते तापमान के बीच गेहूं की फसल को सुरक्षित रखने के लिए खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना ही सबसे प्रभावी उपाय है।
उन्होंने कहा कि किसान फसल की नियमित निगरानी करें और आवश्यकता अनुसार सिंचाई करते रहें, ताकि बढ़ते तापमान से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।