उरई। भूमि संरक्षण विभाग में वित्तीय अनियमितता के गंभीर मामले में निलंबित वरिष्ठ सहायक श्याम ने अब तक कार्यालय का कार्यभार नहीं सौंपा है। इससे विभागीय कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। स्थिति को देखते हुए विभाग ने अब तीन सदस्यीय समिति गठित कर कार्यभार हस्तांतरण प्रक्रिया सुनिश्चित कराने का निर्णय लिया है।
भूमि संरक्षण अधिकारी (राष्ट्रीय जलागम) अभिषेक चंद्रा ने इस संबंध में जानकारी दी। उनके अनुसार, उप कृषि निदेशक जालौन के 26 फरवरी के आदेश के तहत वरिष्ठ सहायक श्याम पर आरोप हैं। उन पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयकों में कथित फर्जीवाड़ा करने का आरोप है। यह आरोप सरकारी धन के दुरुपयोग से संबंधित है। मामले की गंभीरता को देखते हुए 16 फरवरी को एक चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। जांच के दौरान यादृच्छिक परीक्षण किया गया। इसमें पाया गया कि चिकित्सा देयकों में कूटरचित तरीके से लाभार्थियों के खातों में बदलाव किया गया था। इस बदलाव से लाखों रुपये की हेराफेरी की गई। जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया श्याम को दोषी माना गया।
प्रकरण को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के तहत वित्तीय गबन की श्रेणी में रखा गया। इसके बाद 25 फरवरी को कार्रवाई की संस्तुति की गई। इस आधार पर 26 फरवरी को श्याम को निलंबित कर डीपीएपी उरई से संबद्ध किया गया। निलंबन के बाद से श्याम का कोई पता नहीं चल सका है। उन्होंने विभाग को कोई सूचना भी नहीं दी है।
श्याम के पास भंडार एवं स्थापना अनुभाग का कार्यभार भी लंबित है, जिससे विभागीय कार्य बाधित हो रहे हैं। अब विभाग ने सहायक लेखाधिकारी गजेंद्र पाल सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इसमें प्रधान सहायक रविंद्र वर्मा और वरिष्ठ प्राविधिक सहायक दीपक यादव सदस्य होंगे। यह समिति बुधवार को सुबह 10 बजे कार्यालय में पहुंचकर कार्यभार हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कराएगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।