स्टेशन रोड स्थित एक चाय की दुकान पर चुनाव में जीत हार की चर्चा करते लोग।
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मतदान के बाद अब गली, मुहल्लाें, नुक्कड़ाें व चाय, पान की गुमटियाें में बस एक ही चर्चा है कि कौन आगामी एमएलए बनेगा। आखिर किसकी हार व किसकी जीत होगी। समर्थक अपनेअपने हिसाब से लोगाें को जीत का गणित समझा रहे हैं। कोई जातिगत आंकड़े का दावा कर रहा है तो कहीं लोग अपने दल की छवि की दुहाई देकर कह रहे हैं कि बस
अब तो भइया एमएलए बन गए हैं। वहीं राजनीतिक पंडित वोटराें के आधार पर अपना तर्क रख रहे हैं। अब तो यह तय तो 11 मार्च को ही तय होगा कि जीत का सेहरा किस के सिर पर बंधेगा। कुल मिलाकर इस समय यही कहते नजर आ रहे है कि अपने भइया तो एमएलए हो गए। बस घोषणा ही होना बाकी है। बता दें कि कोतवाली के पीछे रामदास का चाय का
होटल है। यहां पुराने से लेकर नए नेताआें का जमावड़ा शनिवार को दिखाई दिया। यहां चर्चा का विषय थे कि कहां और कौन अगला एमएलए बनेगा। नेता चर्चा तो पहले जातिगत आधार पर कर अपने-अपने प्रत्याशियाें की जीत का दावा कर रहे हैं। जहां भाजपाई अगड़ी, पिछडी जाति को आधार वोट मानकर जीत का दावा कर रहे हैं तो वहीं बसपा व सपा
अल्पसंख्यक वोट को आधार मानकर अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। कई बार तो यहां बहस झगड़े की हद तक भी पहुंचती दिखी। इसी तरह कालपी रोड स्थित क्षीर सागर के सामने एक होटल पर राजनीतिक पंडिताें का जमावड़ा रहता है। वहां पर लोग तीनों विधानसभा में अपने-अपने दलाें के प्रत्याशियों की जीत का दावा करते नजर आते हैं। वहां तो
लोग शर्त लगाने से भी नहीं चूकते है। दिन भर इस तरह के दावे कई जगहाें पर होते हैं। कुल मिलाकर निष्कर्ष ये है कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा ये तो 11 मार्च को तय होगा लेकिन फिलहाल हर दल के समर्थक अपने-अपने प्रत्याशी को सिकंदर बता रहे हैं।