खेत में ट्रैक्टर थ्रेसर से फसल की मड़ाई करते किसान।
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किसान इन दिनों खेती के कार्य में व्यस्त हैं। अक्तूूबर माह में दलहनी फसलों की बुवाई के बाद फरवरी के अंत तक लगभग 5 माह में मटर, मसूर, चना की फसलें तैयार हो जातीं हैं इसके बाद कटाई और मड़ाई का कार्य होता है। इसके लिए किसान ट्रैक्टर-थ्रेसर आदि का सहारा लेते हैं। इस बार दलहनी फसलों की पैदावार में गिरावट आई है। इससे किसानों की लागत भी नहीं
निकल पा रही हैं। किसानों का कहना है कि इस बार भी मौसम दगा दे गया और दलहनी की फसलों में कीट लगने के कारण भी पैदावार में कमी आई है। विडंबना ये भी है जब फसल हरी होती है तो इनके भाव मंडी में अच्छे खासे होते हैं। फसल तैयार हो जाती है तो मंडियों में इनके भाव घटने लगते हैं। किसान मदन सिंह, बृजकिशोर, उम्मेद अली, मिथलेश कुमार, विनोद
कुमार, रामकुमार, महेश कुमार आदि का कहना है कि गुरुवार को मसूर के भाव 4100 रुपये प्रति क्विंटल थेे। जब कुछ किसान मसूर लेकर मंडी पहुंचे तो मसूर का भाव 3700 रुपये
प्रति क्विंटल के हिसाब से खुला। किसानों ने फसल घर वापिस लाने की बजाय मजबूरन घाटा खाकर आढ़तियों बेच दी। किसानों की मानें तो एक तो मौसम के अचानक बदलाव ने फसल पर विपरीत असर डाला, ऊपर से कीड़ा भी लग गया। ऐसे में पैदावार उम्मीद से ज्यादा गिर गई। ऐसे में लागत भी निकलती नहीं दिखाई दे रही है।