राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय आह्वान पर दो दिवसीय कार्य
बहिष्कार के पहले दिन मंगलवार को कर्मचारियों ने कामकाज बंद रखकर धरना
प्रदर्शन किया। राज्य कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते
हुए जमकर नारेबाजी की। इस दौरान कर्मचारियों ने कहा कि पूर्व में भी अपना
हक पाने के लिए आवाज बुलंद की जिसे दबाने का
प्रयास किया गया। मांग रखी कि
राज्य कर्मियों को 300 दिन के अर्जित अवकाश के स्थान पर 600 दिन का
उपार्जित अवकाश की सुविधा के साथ नगदीकरण की सुविधा दी जाए। कार्य बहिष्कार
के कारण सारे दफ्तर बंद रहे। जो कर्मचारी काम करने बैठा, उसे करने नहीं
दिया गया। इससे काम के लिए पहुंचे लोगों को बैरंग लौटना पड़ा।
मंगलवार
को विकास भवन परिसर में राज्य कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले
कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर धरना और प्रदर्शन किया। अध्यक्ष
रामप्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि कर्मचारियों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं
किया जाएगा। सरकार ने भरोसा देकर कर्मचारियों की अनदेखी की है। सरकार की
हठधर्मिता नहीं चलने दी जाएगी। हरीष राठौर ने कहा कि 7,
14, 20 वर्षों की
कुल सेवा के आधार पर तीन पदोन्नति पद का ग्रेड वेतन दिया जाए। ग्रेच्युटी
की अधिकतम सीमा 15 लाख की जाए। इसके अलावा उन्होंने अन्य मांगो को भी रखा। कार्यवाहक
अध्यक्ष शील कुमार दूरवार ने कहा कि यह सरकार कर्मचारियों के साथ अन्याय
कर रही है। कर्मचारियों को एकजुट रहकर अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ा।
उन्होंने
कहा कि वादाखिलाफी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
धीरेंद्र दुबे ने कहा कि मृतक आश्रित पर लिपिक पद की तुरंत नियुक्ति की
जाए। आंगनबाड़ी कार्यकत्री संघ की अध्यक्ष रेखा जाटव ने कहा कि
कार्यकत्रियों को राज्य कर्मचारियों का दर्जा दिया जाए। इसके अलावा मानदेय
बढ़ाने की मांग पर सरकार को जल्द विचार करना चाहिए।
हरीराम ओमरे ने कहा
कि डीआरडीए के कर्मचारियों को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। डा.
रामप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि कर्मचारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया
जाएगा। विभिन्न संवर्गों के संविदा कर्मियों का मानदेय बढ़ाकर 15 हजार
रुपये किया जाना चाहिए। धरना प्रदर्शन को कैलाश यादव, राजकुमार गौतम, बीएल
पारासर, रविंद्र सिंह, शत्रुघन सिंह,
सतीश वर्मा, हर्वेंद्र सिंह, साधना
सिंह, प्रभा शुक्ला, आरसी पस्तोर, प्रवेश यादव, रामसिंह प्रजापति, संजीव
कुमार, राजीव गोयल, आरके यादव, गुलाब सिंह, मनोेज गौतम, रामलला दीक्षित,
रमेश उदैनियां, मुहम्मद मुबारक, मनोज कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।
ये भी हुए आंदोलन में शामिल
राज्य
कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले कार्य बहिष्कार व धरना प्रदर्शन में
ग्राम विकास विभाग, पंचायत विभाग, मनरेगा, ग्राम रोजगार सेवक, आंगनबाड़ी,
सफाई कर्मचारी, अमीन, लेखपाल, एएनएम, पशु पालन, पूत्रि विभाग, डीआरडीए,
नलकूप, सिंचाई, आशा बहू, समेत अन्य विभागों में काम करने वाले कर्मचारी
शामिल रहे।
आफिस रहे खाली
मंगलवार को बीएसए कार्यालय के
कर्मचारियों ने कलमबंद हड़ताल केे चलते विकास भवन में धरना दिया। इसके चलते
बीएसए कार्यालय के आफिस के कमरों में सन्नाटा छाया रहा। कलमबंद हड़ताल में
बीएसए कार्यालय के श्रीमन नारायन द्विवेदी, दिनेश चंद्र कौशिक, काशी
वर्मा, मदन गोपाल, अमित सक्सेना,दीपेंद्र राजपूत, त्रिलोकी गुप्ता,
धीरेंद्र दुबे आदि मौजूद रहे।
यह रही प्रमुख मांगें-
-नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू किया जाए।
-फील्ड कर्मचारियों को मोटरसाइकिल भत्ता के साथ सीयूजी सिम कार्ड दिया जाए।
-संविदा कर्मियों का मानदेय 15 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए।
-सींचपाल व नलकूप चालक को ग्रेड पे 2800 अनुमन्य किया जाए।
-रसोइयों की नवीनीकरण प्रक्रिया समाप्त की जाए।
-सफाई कर्मियों को प्रधान के बंधन से मुक्त किया जाए।
-राजस्व निरीक्षक के पद पर लेखपालों की शीघ्र नियुक्ति की जाए।
-कर्मचारियों की अधवर्षता आयु 62 वर्ष सभी पर लागू की जाए।
-संग्रह अमीन का ग्रेडपे 2800 रुपये किया जाए।
-ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 15 लाख की जाए।
विकास भवन में गूंजते रहे नारे
विकास भवन परिसर में राज्य कर्मचारी परिषद के तत्वावधान में कार्य
बहिष्कार करते हुए कर्मचारियों की ओर से प्रदर्शन उन लोगों को भारी पड़ गया
जो अपनी समस्या को लेकर दफ्तर पहुंचे। विकास भवन में स्थित दफ्तरों के
अलावा शिक्षा विभाग, सिंचाई विभाग समेत अन्य विभागों में काम काज ठप रहा।
कर्मचारियों
ने सरकार के खिलाफ कार्य बहिष्कार किया। इसका फायदा उन्हें भले ही मिला हो
लेकिन कई लोगों के लिए परेशानी बढ़ी रही। दूर इलाके से जो लोग समस्याओं के
निदान की उम्मीद लेकर मुख्यालय आए उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। जिला
ग्राम्य विकास अभिकरण हो या फिर समाज कल्याण विभाग, कृषि विभाग, सिंचाई
विभाग, पशुपालन विभाग,
जिला पूर्ति कार्यालय समेत अन्य दफ्तरों में लोग
पहुंचे लेकिन सीट पर कोई कर्मचारी उन्हें नहीं मिला। जहां काम हो भी रहा था
वहां पर कर्मचारियों ने पहुंचकर काम बंद करा दिया। कर्मचारियों के इस
प्रर्दशन पर लोगों में मन ही मन नाराजगी देखी गई।