अतिक्रमण से नगर की सड़कें संकरी व फुटपाथ तकरीबन लापता-सा हो गए हैं। हाल यह है कि सड़कों पर पैदल निकलना मुश्किल हो रहा है। अतिक्रमण से दिन में कई बार जाम लगना रोजाना की बात हो गई है। सुबह-शाम यातायात का ज्यादा दबाव होने से एक बार जाम लगने से कई-कई घंटे तक खुलने का नाम नहीं लेता है।
ऐसे में जाम में फंसे राहगीरों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ती है। कोंच के प्रवेश द्वार मारकंडेयश्वर तिराहे से लेकर पूरे राजमार्ग पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। दुकानदारों ने दुकानें बाहर तक निकाल रखी हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति रामगंज बाजार, सर्राफा बाजार, पसरट बाजार, बर्तन बाजार और सब्जी मंडी से लगते इलाकों की है।
विशेषकर रामगंगा बाजार में दोनों तरफ के दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे अतिक्रमण कर रखा है। आलम यह है कि बीस फीट की सड़क पगडंडी जैसी दिखाई देती है। मुख्य बाजार होने और आवागमन का मुख्य मार्ग होने से इस इलाके में भीड़ भी खासी लगती है।
इससे इस रूट पर हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है। कमोवेश यही स्थिति बर्तन बाजार, सर्राफा बाजार, मानिक चौक, मणिहार बाजार, सब्जी मण्डी, पसरट बाजार आदि की भी है जहां लोगों का निकलना दूभर है। उधर, अवैध पार्किंग के चलते मुख्य राजमार्ग पर जाम की स्थिति बनी रहती है।
बाजारों में खड़ी मोटर साइकिलें और भारी वाहनों का बाजारों में बेतरतीब खड़े रहना यहां से गुजरने वाले लोगों की लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन जाता है। इस सम्बंध में शहर के नागरिकों, जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के साथ होने बाली बैठकों में और इनके इतर भी कई बार शिकायत की।
जाम की समस्या से निपटने के लिए कार्ययोजना भी बनाई गई पर इस कार्ययोजना पर अमल नहीं हो सका। लिहाजा समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।