श्रीमद्भागवत कथा में भगवताचार्य ने कहा कि अपमान उसी का होता है जिसे
सम्मान की भूख होती है। उन्होंने कहा कि शिव देवों के देव महादेव हैं और
उनकी निंदा करने वाले को कभी मुक्ति नहीं मिलती है। उन्होंने भगवान कृष्ण
की लीलाओं सुंदर वर्णन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भागवताचार्य
पं.नवनीत मिश्र शास्त्री ने कहा कि दक्ष प्रजापति के यहां आयोजित यज्ञ सभा
में सभी देवता गए। वहां दक्ष ने कहा कि किसी भी यज्ञ में दूसरे देवों के
साथ शिव को आहुति नहीं दी जाएगी। सभा में विराजमान नंदी को यह बात अनुचित
लगी और क्रोधावेग में उन्होंने दक्ष को तीन श्राप दे दिए। जिस मुख से शिव
निंदा की है वह सिर ही नहीं रहेगा, सिर के स्थान पर
बकरे का सिर लगाया
जाएगा और ब्रह्म विद्या कभी नहीं प्राप्त होगी क्योंकि शिवजी की निंदा करने
वाले को कभी मुक्ति नहीं मिलती है। उन्होंने कहा कि शिव तत्व को छोड़ने
वाली बुद्धि को संसार में भटकना पड़ता है, वह हमेशा दुख को प्राप्त करता
है।
कथा व्यास ने भगवान वासुदेव कृष्ण की मनोहारी बाल लीलाओं का सुंदर
वर्णन किया। भगवान द्वारा गोपियों के साथ रचाये
गये महारास का वर्णन किया।
कथा परीक्षित विमला देवी हिंगवासिया ने आरती उतारी। इस दौरान ब्राह्मण
महासभा अध्यक्ष देवीदयाल रावत, महामंत्री अनुरूद्घ मिश्रा, लल्लूराम
मिश्रा, अखिलेश बबेले, राजेन्द्रमोहन अवस्थी, सतीश हिंगवासिया, सर्वाचरण
वाजपेयी, राहुल तिवारी, आनंद दुवे, राजेन्द्र भारद्वाज, सतीश रिछारिया,
दिनेश दुवे, संजय रावत आदि मौजूद रहे।