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संघर्षों से हासिल किए अधिकार, मिला सम्मान

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ार्यक्रम में मौजूद महिलाओं की भीड़ - फोटो : ORAI
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उरई (जालौन)। महिलाओं के समूह बनाकर, शिक्षा की अलख जगाकर एवं गली-गली में समाजसेवा के माध्यम से समाज में अपनी अलग पहचान बनाने वाली गांव-कस्बों की महिलाओं को अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स एवं परमार्थ समाजसेवी संस्थान के संयुक्त बैनर तले महिला दिवस के उपलक्ष्य पर सम्मानित किया गया। परमार्थ संस्था के निदेशक अनिल सिंह ने कहा कि आज के युग में नारी ने समाज को अपनी शक्ति का अहसास कराया है, यही वजह है कि नारी कमजोर नहीं बल्कि अपने अधिकारों को हासिल करने वाली साबित हुई है।
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शहर के इंद्रा पैलेस में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण इलाकों से सैकड़ों महिलाएं हिस्सा लेने आईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ रेनू चंद्रा व संचालन एसपी सिंह ने किया। मुख्य अतिथि सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा ने बताया कि केंद्र व प्रदेश सरकार विशेष तौर पर बेटियों की शिक्षा के लिए तमाम योजनाएं चला रही हैं। बेटियां पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो, इसके लिए भी तमाम योजनाएं है। इतना ही नहीं गरीब बेटियों की शादी की चिंता भी अब उनके माता-पिता को करने की जरूरत नहीं है।
सरकार की सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से अब तक सैकड़ों बेटियों के हाथ पीले किए जा चुके हैं। महिलाओं को चाहिए कि इन योजनाओं का लाभ उठाकर वे आत्मनिर्भर बने और न सिर्फ अपने परिवार बल्कि समाज में भी अपना योगदान दे सके। जिला प्रोवेशन अधिकारी गुलाब सिंह ने बताया कि महिला उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों का ही असर है कि गांव कस्बों की अनपढ़ महिलाएं आज अपने नजदीक के विद्यालयों में पढ़ने जा रही हैं। गांव-गांव समूह तैयार महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।
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जिला विकास अधिकारी मिथलेश सचान ने कहा कि महिलाएं स्वयं को कभी कमजोर न समझें क्योंकि यही धारणा महिलाओं को उनके अधिकारों से दूर करती है। महिलाओं को चाहिए कि वे दृढ़ इच्छा शक्ति से अपने अधिकारों को हासिल करने के लिए संघर्ष करें। महिला थानाध्यक्ष नीलेश कुमारी ने कहा कि उत्पीड़न व शोषण करने से ज्यादा गलत उसे बर्दाश्त करना है। इसलिए महिलाओं को शोषण व उत्पीड़न पर चुप्पी नहीं साधना चाहिए बल्कि उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
उनकी सुनवाई के लिए ही हर जिले में अलग से महिला थाने भी बनाए गए हैं। बेहतर होगा कि महिलाएं अपनी मदद स्वयं करें, किसी दूसरे के भरोसे न रहें। डॉ रेनू चंद्रा ने बेटियों के स्वास्थ्य का महत्व बताया। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों से विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य करने वाली 17 महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा डॉ ममता स्वर्णकार, समाजसेवी शशि सोमेंद्र सिंह, संध्या झा, जूली खातून बाल संरक्षण अधिकारी, समाज सेवी भूपेंद्र गुप्ता, विनीता पांडेय आदि रहे।
इन महिलाओं को किया गया सम्मानित
स्वयं सहायता समूह चलाने वाली मढे़पुरा की पूनम देवी। वर्षा जल संचयन के लिए धमना की सीमा देवी। सामुदायिक किचन गार्डन बनाने वाली पचोखरा की जमुना देवी। बालिका शिक्षा के लिए तौर गांव की ममता देवी। वर्षा जल संचयन व सब्जी उत्पादन के लिए सुशीला देवी। शौचालय निर्माण एवं पेयजल स्रोतों के रखरखाव के लिए टीहर की किरन देवी। कम पानी की जरूरत वाली फसलों के लिए सोनेपुरा की माया देवी तालाब, कुंआ एवं पेयजल के लिए हैदलपुरा की राममूर्ति। महिला अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली मल्हानपुरा की लौंगश्री। सामुदायिक किचन गार्डन के लिए कनार की शांति देवी। उरई की शहनाज, सुरहती की अभिलाषा, रगौली की सुषमा व कमलेश, बघौरा की माया, उमरारखेरा की ममता के अलावा मुस्कान हास्पिटल की नर्सिंग छात्राओं को भी सम्मानित किया गया।
रैली में भी गूंजे महिला अधिकार के नारे
उरई। अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स एवं परमार्थ समाजसेवी संस्थान की ओर से सुबह के वक्त शहर के टाउन हाल से महिलाओं की अधिकारों के प्रति जागरुकता के लिए रैली निकाली गई। रैली को एआरटीओ सोमलता और खाद्य अभिहीत अधिकारी प्रियंका सिंह ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली शहीद भगत सिंह चौराहे से आंबडेकर चौराहा होकर कलक्ट्रेट पहुंची। हाथों में बैनर व तख्तियां लेकर बराबर साथ निभाएं, महिलाएं अब आगे आएं और नारियां नहीं कभी बेचारी, नारियों में है शक्ति सारी के नारों के साथ रैली कलक्ट्रेट पहुंची।

रैली को हरी झंडी दिखाती एआरटीओ एवं खाद्य अभिहीत अधिकारी।- फोटो : ORAI

सम्मान पाने वाली महिलाओं के साथ मंच पर मौजूद अतिथि- फोटो : ORAI

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