उरई। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र की मदद से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले 17 लोगों के खिलाफ कुठौंद थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। जिला दिव्यांगजन अधिकारी शिव सिंह का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी है, जिसमें फर्जीवाड़ा करने वाले कुछ और लोगों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज की जा सकती है।
कुठौंद थाना क्षेत्र के बावली निवासी अशोक पुत्र गिरधारी, जमलापुर निवासी चंपा देवी पत्नी अवधेश, नदीगांव थाना क्षेत्र के ग्राम तजपुरासनी निवासी नरेश चंद्र पुत्र कथूले, सिरसाकलार के बुद्धसिंह पुत्र देवीदयाल, माधौगढ़ क्षेत्र के कंचनपुर निवासी विनोद कुमारी पत्नी दशरथ, सिरसादोगढ़ी निवासी चंदा पत्नी अमर सिंह, एट निवासी नौशाद पुत्र ईशाक, डकोर के जैसारी खुर्द निवासी सुंदर सिंह पुत्र दुर्गाचरण, हीरापुर मुस्तिकल निवासी खेमचंद्र पुत्र मन्नीलाल, कालपी थाना क्षेत्र के आलमपुर निवासी राममनी पत्नी रमेश, मडिय़ा निवासी शांति पत्नी सत्यनारायण, सहाव (जालौन) निवासी हरिओम पुत्र ओमप्रकाश, मालवीयनगर कोंच निवासी नदीम अहमद पुत्र वसीम अहमद, राजेंद्रनगर निवासी मदन सोनी पुत्र शिवनारायण, मुसमरिया निवासी कुंती पत्नी रमाकांत समेत 17 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी शिवसिंह ने बताया कि उनके कार्यालय में पेंशन के लिए 23 लोगों दिव्यांग प्रमाणपत्र लगाकर पेंशन के लिए आवेदन किया था। संदिग्ध प्रमाणपत्र लगने पर उन्होंने प्रमाणपत्रों को जांच के लिए सीएमओ कार्यालय भिजवाया। जहां सत्यापन में 17 प्रमाणपत्र फर्जी मिले। इस पर उन्होंने एसपी डा. सतीश कुमार को इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा। एसपी के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने वालों में हड़कंप मच गया।
दिव्यांगों को मिलती है 500 रुपये पेंशन
उरई। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी शिवसिंह ने बताया कि इस समय उनके कार्यालय में 12,392 लाभार्थी है, जिन्हें हर महीने शासन की ओर से पांच सौ रुपये की पेंशन दी जाती है। यह पेंशन उनके खाते में भेजी जाती है लेकिन आधारकार्ड लिंक होने और आनलाइन आवेदन के बाद फर्जीबाड़े में कमी आ गई है।
पहले भी हो चुकी है 17 पर कार्रवाई
उरई। सीएमओ डा. अल्पना बरतारिया ने बताया कि डीएम ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए है। उनके कार्यालय की ओर से संदिग्ध आवेदन मिलने पर ऐसे लोगों को नोटिस भेजकर प्रमाणपत्र की जांच कराने को कहा गया था। जब वह प्रमाणपत्रों की जांच कराने नहीं आए तो फर्जी मानते हुए 14 जून 2019 को 17 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।