कोंच। मिशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों को सुसज्जित करने का अभियान चल रहा है। शासन प्रशासन ने सभी विद्यालयों का कायाकल्प करने का फरमान जारी किया है। निष्प्रयोज्य व जर्जर भवनों को गिराने का आदेश भी जारी किया गया है लेकिन तमाम विद्यालय ऐसे भी हैं जिनके जर्जर भवन बच्चों के जीवन के लिए खतरे की घंटी बने हुए हैं। इससे उन विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक और बच्चों के अभिभावक दोनों ही फिक्रमंद हैं।
पचास के दशक से कस्बे में सागर तालाब के किनारे बल्दाऊ धर्मशाला के बगल में स्थित एक भवन में दो-दो विद्यालय संचालित हो रहे हैं और बिल्डिंग जर्जर हालत में खड़ी है। प्राथमिक विद्यालय पटेल नगर व प्राथमिक विद्यालय कस्तूरबा विद्यालयों के जर्जर व निष्प्रयोज्य घोषित भवन में नौनिहालों की जान के लिए हर समय खतरे की घंटी बजती रहती है। फटी दीवारों और जर्जर हो चुकी छतों का यह विद्यालय भवन कब धराशायी हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा का भय हमेशा सताता रहता है। प्रधानाचार्य विनय कुमार बाथम ने बताया कि इस किराए की बिल्डिंग में 1947 से दोनों स्कूल संचालित हो रहे हैं, विद्यालयों में दो सैकड़ा बच्चों के पंजीकरण हैं। कई बार लिख कर विभाग को भेज गया है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लगता है शायद किसी हादसे का इंतजार हो रहा हैै।
कस्बे में एक जर्जर भवन में दो विद्यालय संचालित हो रहे हैं। उस भवन का आधा हिस्सा तीन साल पहले ही धराशायी हो चुका हैं। इसके बाद बच्चों को शिक्षा भवन के बाहर बैठा कर दिलाई जाती थी लेकिन प्रधानाचार्य विनय कुमार बाथम ने दो कमरों की छत तुड़वा कर टिन शेड डलवा दिए थे जिसमें दोनों विद्यालय के बच्चों की क्लास लगाई जा रही हैं।