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राठौर तुम जांबाज, रिवाल्वर तो सलामी लायक

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प्रतिवादी पक्ष के वकील युसूफ इश्तियाक जानकारी देते हुए - फोटो : ORAI
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कोंच (जालौन)। घटना के भले ही पंद्रह साल हो गए हो लेकिन जिसने भी घटना देखी उसकी आंखें घटना के मंजर को भूल नहीं पा रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि उस वक्त तत्कालीन डीएम राजीव अग्रवाल ने सूझबूझ से काम न लिया होता तो न जाने कितनी और लाशें कोतवाली के भीतर से लेकर बाहर गेट तक बिछ जातीं।
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इलाकाई लोगों ने बताया कि जिस वक्त सुरेंद्र, महेंद्र व दयाशंकर के शव कोतवाली के भीतर खून से लथपथ पड़े थे, उस वक्त इंस्पेक्टर राठौर आंखों में खून और हाथों में सर्विस रिवाल्वर लेकर साथी पुलिस कर्मियों के साथ कोतवाली गेट पर अपनी फायरिंग की पोजीशन के साथ खड़ा था। भीड़ और आसपास के थानों की फोर्स भी गेट के सामने खड़ी थी लेकिन किसी की हिम्मत नहीं थी कि वह आगे बढ़कर राठौर को पकड़ पाता।
इसी बीच तत्कालीन डीएम राजीव अग्रवाल मौके पर पहुंचे और स्थिति को समझते हुए उन्होंने राठौर से कहा कि इंस्पेक्टर तुमने बिल्कुल ठीक किया, तुम वाकई जांबाज हो और तुम्हारी रिवाल्वर तो वाकई सम्मान के लायक है। तुम बिल्कुल भी परेशान मत होना, बलवा करने वाली पब्लिक के लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर इन्हें सलाखों के पीछे डाला जाएगा। बस यह कहते हुए डीएम ने राठौर के कंधे पर हाथ रखा और उसे लेकर कोतवाली के भीतर गए।
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भीतर जाते ही कुछ हद तक शांत हो चुके राठौर ने भी अपनी रिवाल्वर निकालकर मेज पर रख दी, बस यही वह मौका था, जिसे डीएम ने गंवाना ठीक नहीं समझा और उन्होंने तुरंत ही रिवाल्वर को अपने हाथ में लेते हुए राठौर की गिरफ्तारी के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस कर्मियों की गिरफ्त में होने के बाद भी राठौर डीएम को पब्लिक के सामने अनाप शनाप बकता रहा। सभी ने डीएम के प्रयास की सराहना भी की।
हत्या एक ने की सजा सात को मिली
उरई। प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता यूसुफ इश्तियाक का कोर्ट के फैसले पर कहना है कि वे न्यायालय का पूरा सम्मान करते हैं और इस मामले को लेकर हाईकोर्ट तक जाएंगे। उन्हें पूरा भरोसा है कि उन्हें इंसाफ जरूर मिलेगा। यूसुफ का कहना है कि मामले की हकीकत तो बस इतनी ही है कि कोतवाली हत्याकांड को सिर्फ तत्कालीन इंस्पेक्टर डीडीएस राठौर ने ही अकेले अंजाम दिया था, जबकि सात लोगों को दोषी साबित किया गया है। मुख्य दोषी यानी तत्कालीन इंस्पेक्टर की जेल में मृत्यु भी हो चुकी है। इसी बात को लेकर वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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