उरई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व एडीजे महेंद्र कुमार रावत ने बताया कि विचाराधीन बंदी यदि जेल में कुछ सजा काट चुके हैं। वह सात साल तक के मामलों के आरोपी हैं। ऐसे बंदी पीड़ित पक्ष को उचित मुआवजा देकर समझौता कर अपनी सजा न्यायालय से कम करा सकते हैं।
जिला न्यायाधीश लल्लू सिंह के निर्देशन पर गुरुवार को एडीजे महेंद्र कुमार रावत ने जिला कारागार में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया। शिविर में मौजूद सिद्धदोष व विचाराधीन बंदियों को महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये एडीजे ने प्ली-वार्गेनिंग स्कीम, समयपूर्व रिहाई और बंदियों के अधिकारों के संबंध में बताया।उन्होंने कहा कि अधिकतम सात वर्ष तक की सजा के मामलों में विचाराधीन बंद, जो सजा के तौर पर कुछ समय जेल में बिता चुका हो। वह पीड़ित पक्ष से समझौता कर उसे उचित मुवायजा देकर अपनी सजा न्यायालय से कम करा सकता है।
इस योजना का लाभ उनको नहीं मिलेगा, जिन्होंने देश के विरुद्ध, महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध या आर्थिक अपराध किया हो। सभी बैरिकों का निरीक्षण किया। निरुद्ध विचाराधीन बंदियों से वार्ता की। उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए पर्याप्त साफ-सफाई को निर्देशित किया। जेल अधीक्षक नीरज देव, चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल वर्मन, उपकारापाल तारकेश्वर सिंह, अमर सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के कनिष्ठ लिपिक शुभम् शुक्ला मौजूद रहे।