नि:शुल्क और बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अब
गरीबों केे बच्चे पब्लिक स्कूलों में फ्री पढ़ाई कर सकेंगे। अब इनकी पढ़ाई
में फीस बाधक नहीं बनेगी। इनकी पढ़ाई की फीस सरकार वहन करेगी।
गौरतलब हो
कि राइट टू एजुकेशन के नियम से हर बच्चे को पढ़ने का अधिकार है। इतना ही
नहीं, वह मनचाहे स्कूल में पढ़ाई कर सकता है। पढ़ाई करने के लिए अब फीस
आडे़ नहीं आएगी।
गरीब परिवार केे बच्चों के लिए प्रत्येक पब्लिक स्कूल में
25 प्रतिशत फ्री दाखिला देने का नियम है। अभी फिलहाल इस नियम का जिले के
पब्लिक स्कूलोें में कड़ाई से पालन शुरू नहीं हो सका है।
यही वजह है कि जब
से शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ है, तबसे वर्ष 2015 तक जिले के
पब्लिक स्कूलों मेें फ्री पढ़ने वाले बच्चों की संख्या शून्य थी। 2015-16
में जब कड़ाई की गई तो जिले में कुल 41 बच्चों का ही पब्लिक स्कूलों में
दाखिला हो पाया है।
इस मर्तबा शासन के सख्त निर्देश है कि 25 प्रतिशत
दाखिला न करने पर कार्रवाई की जाएगी। यह स्थिति तब है जब 25 प्रतिशत गरीब
बच्चों का दाखिला लेने पर उन बच्चों की फीस सरकार देती है।