रामपुरा/कोंच। आगामी त्योहारों की तैयारी को लेकर थाना परिसर में सालिकराम की अध्यक्षता में पीस कमेटी की बैठक हुई। इसमें बकरीद व कांवड़ यात्रा को लेकर नगर व आसपास के लोगों को बुलाकर थाने में चर्चा की गई। जिसमें एसडीएम सालिकराम व सीओ शाहिदा नसरीन ने कहा कि बकरीद का त्योहार पहले पड़ रहा हैं। कोरोना गाइडलाइन को पालन करते हुए मस्जिद में पांच लोगों से अधिक नमाज अदा न करें। चेयरमैन शैलेंद्र सिंह ने कहा कि त्योहार पर सफाई की व्यवस्था दुरुस्त रहेगी। थाना प्रभारी निरीक्षक जेपी पाल ने कहा कि थाना क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बकरीद के त्योहार पर कोई भी व्यक्ति धार्मिक भावनाओं को लेकर शांति व्यवस्था को भंग न करे। बैठक में पिंकी त्रिपाठी, प्रदीप गौरव, जाकिर, अमरसिंह पाल आदि मौजूद रहे।
कोंच संवाद के अनुसार 21 जुलाई को बकरीद व श्रावण मास को लेकर थाना कैलिया में थानाध्यक्ष अनिल कुमार व थाना नदीगांव में थानाध्यक्ष आरके सिंह की अध्यक्षता में शांति सुरक्षा समिति की बैठक हुई। बैठकों में लोगों व ग्राम प्रधानों ने दोनों पर्वों के मद्देनजर अपनी समस्याएं रखीं। बैठक में दारोगा दिनेश गिरि, सुरेन्द्र सिंह, जितेंद्र सिंह, नगर पंचायत से शिवकुमार पांडे, सभासद पवन झा,अनूप शर्मा, शिवशंकर,जीशान,फरीद कादरी,पप्पन खान, आमोद उदैनिया आदि रहे।
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बकरीद में करें सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी
संवाद न्यूज एजेंसी
मुहम्मदाबाद। इस्लाम में अपनी सबसे अजीज चीज की कुर्बानी देने का सिलसिला सदियों से चला आ रहा है। ऐसे ही अल्लाह राह पर पिता इब्राहीम खलील उल्लाह की छुरी उनके बेटे हजरत इस्माइल जबी उल्लाह की गर्दन पर नहीं चली। तब पिता इब्राहीम खलील उल्लाह ने गुस्से में छुरी को जमीन पर पटक दिया। धर्मगुरुओं का मानना है कि छुरी से न चलने का सवाल पूछा तो रब की तरफ से छुरी को भी जुबान मिली और उसने इब्राहीम खलील उल्ला से बताया जब नमरूद ने आपको आग में डाला था तो उसने आपको जलाया क्यों नहीं था। क्योंकि रब ने आग को आपको जलाने से सिर्फ एक बार मना किया था। पर छुरी ने जवाब दिया कि मुझे तो न चलने के लिये सत्तर बार मना किया गया था। इस तरह इब्राहीम खलील उल्लाह अपने रब के इम्तिहान पर खरे उतरे और उनके बेटे इस्माइल जबी उल्लाह को रब ने कुर्बान होने से तो बचाया। पर उनके स्थान पर एक बकरे की कुर्बानी दी गई। तबसे इस्लाम में कुर्बानी का सिलसिला शुरू हो गया।
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फोटो-3-मारुफ मिया।
मालदार हैं तो अनिवार्य है कुर्बानी
सज्जादानशीं मारुफ मिया ने बताया कि ईद उल अजहा पर्व दुनिया के कई स्थानों पर मनाया जाता है। इस बार यह 21 से 23 जुलाई को मनाया जाएगा। बताया कि धार्मिक दृष्टि से तो इस पर्व में प्रत्येक मुसलमान जिसकी माली हालत साढ़े 52 तोला चांदी व साढ़े 7 तोला सोना या दोनों को मिलाकर संपत्ति है, उसकी कुर्बानी जायज है। पर जिसकी आर्थिक स्थिति सही न है वह कुर्बानी न करें।
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फोटो-4-हाफिज अंसार।
नहीं काटे जाते बाल व नाखून
बकरीद पर्व के बारे में जानकारी हाफिज अंसार ने बताया कि उक्त पर्व का चांद दिखने के बाद से मुस्लिम समुदाय के लोग बाल, नाखून, सेविंग आदि तब तक नहीं काट सकते, जब तक बकरीद के दिन जानवरों की कुर्बानी न हो जाए। मान्यता है कि लोग त्योहार के दिन या फिर बाद में बाल आदि कटवाकर कुर्बानी का शबाब लेते हैं। जिस मुस्लिम व्यक्ति या महिला के नाम से कुर्बानी होती है वह एक दिवसीय रोजा भी रखता है।
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फोटो-5-मोहन अतरौलिया।
10 से 20 हजार के बिके बकरे
बकरीद की कुर्बानियों का सिलसिला सुबह नमाज के बाद शुरू हो जाता है। पर्व से पहले बकरों की खूब मांग रहती है। मुस्लिमों ने 10 से लेकर 20 हजार तक के बकरे खरीदे। व्यापारी मोहन अतरौलिया ने बताया कि कुर्बानी उसी बकरे की होनी चाहिए जिसकी उम्र एक साल में एक घंटा भी कम न हो और वह जिस्मानी तौर पर सींग, पूंछ, कान, खुर्र आदि में कोई नुख्श न हो। उसी की कुर्बानी जायज है।
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बकरीद में प्रतिबंधित जानवरों की न दें कुर्बानी
जालौन। बकरीद के पर्व को लेकर चौकी परिसर में शांति समिति की बैठक का आयोजन एसडीएम मीनू राणा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मस्जिदों के आसपास साफ सफाई कराने, आवारा जानवरों को बंद करने एवं बिजली व पानी की सप्लाई किए जाने की मांग की गई। एसडीएम ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया। एसडीएम ने कहा कि बकरीद के पर्व पर प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी किसी भी स्थिति में न की जाए। कुर्बानी के बाद बचे हुए अवशेषों को जमीन में दफना दें। उन्हें इधर-उधर खुले में न फेंके। इस दौरान सीओ विजय आनंद, कोतवाल सुनील सिंह, ज्ञानेश्वर, मौलाना साबिर, मौलाना सुल्तान, हाजी अतीक, इकबाल, नईम खान आदि मौजूद रहे। (संवाद)