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Jalaun News: प्रताड़ना से आहत नर्सिंग छात्र ने की जान देने की कोशिश की

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उरई। मेडिकल कॉलेज के बीएससी नर्सिंग के छात्र ने शनिवार को नोडल अधिकारी व लिपिक पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाकर छत से कूदने की कोशिश की। साथियों ने बचा लिया। छात्र को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है। खफा सैंकड़ों छात्र-छात्राओं ने प्राचार्य के कार्यालय के बाहर प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए नारे लगाए। सुरक्षा कर्मियों और छात्र-छात्राओं के बीच धक्का-मुक्की हुई। छात्रों को उग्र देख प्रभारी प्राचार्य ने उन्हें बुलाकर समस्याएं सुनीं।
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शनिवार की सुबह बीएससी नर्सिंग (प्रथम वर्ष) के छात्र मऊ निवासी अनुराग प्रसाद ने छत से कूदने का प्रयास किया। इससे पहले उसने एक सुसाइड नोट भी सोशल ग्रुप में लिखकर डाल दिया। साथियों को जानकारी होने पर उन्होंने उसे बचाया। इस दौरान अनुराग की हालत बिगड़ गई।
आरोप है कि इस पर जब छात्रों ने एचओडी सुधा स्वामी से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ लिया। इससे छात्र-छात्राएं और भी आक्रोशित हो गए। उन्होंने नोडल अधिकारी आफरीना नासिर व कॉलेज के लिपिक पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने व परीक्षा से वंचित करने की धमकी देने का आरोप लगाया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज में बिना रुपये दिए कोई भी काम नहीं होता है। लिपिक हर छात्र से 10-10 हजार रुपये की मांग करते हैं। उनके हॉस्टल में पिछले सात माह से पानी नहीं आ रहा है। वह बाहर से खरीद कर पानी पीने के लिए मजबूर हैं। जब उन्होंने इसकी शिकायत नोडल अधिकारी से की तो उन्हें भगा दिया गया।
आक्रोशित छात्र-छात्राएं नारेबाजी करते हुए प्रभारी प्राचार्य शैलेंद्र सिंह से मिलने की जिद पर अड़ गए। प्राचार्य कक्ष की ओर बढ़े तो सुरक्षा कर्मियों ने अभद्रता करते हुए उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इस पर छात्र नहीं माने और प्राचार्य कक्ष में घुस गए। जानकारी पर नोडल अधिकारी आफरीना नासिर भी वहां पहुंचीं। प्रभारी प्राचार्य के सामने एक-एक कर करीब सौ छात्रों ने उन पर गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान नोडल अधिकारी, लिपिक को हटाने की मांग की। इसके बाद प्रभारी प्राचार्य ने छात्र-छात्राओं से शिकायती पत्र लेकर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।
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सवाल पूछने या असहमति जताने पर धमकी मिलती है, इंटरनल में फेल कर दूंगी
हंगामे के दौरान कई छात्र-छात्राओं ने कहा, प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने का आता है विचार
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। मेडिकल कॉलेज में चले हंगामे में कई नर्सिंग के कई छात्र-छात्राओं ने कहा कि वह मानसिक रूप से तनाव में हैं। सवाल पूछने या असहमति जताने पर नोडल अधिकारी धमकी देती हैं कि इंटरनल में फेल कर दिया जाएगा।
छात्र-छात्राओं ने कहा कि प्रताड़ना से तंग आकर कई साथी आपस में बातचीत के दौरान आत्महत्या का विचार जाहिर कर चुके हैं। आरोप है कि प्रबंधन ने उनके माता-पिता से भी गाली-गलौज की है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि कॉलेज के क्लर्क खुलेआम अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। जब हम विरोध करते हैं तो कहते हैं कि फॉर्म भरना है तो चुप रहो। कई बच्चों ने यह भी बताया कि जो लोग डॉ. अफरीना के खिलाफ बोलते हैं, उन्हें टारगेट किया जाता है।
छात्राओं ने बताया कि जनवरी 2025 में कॉलेज के प्राचार्य और उपप्राचार्य को अचानक हटा दिया गया, जबकि वह छात्र हितैषी थे और समस्याएं सुनते थे। इसके तुरंत बाद ही डॉ. आफरीना को कॉलेज का नियंत्रण दे दिया गया।
आरोप लगाया कि कॉलेज का वातावरण इतना डरावना बन दिया गया है कि अधिकांश छात्राएं चुप रहना ही बेहतर समझती हैं। छात्र-छात्राओं ने मांग की है कि डॉ. अफरीना नसीर को तुरंत पद से हटाया जाए। राय बाबू को निलंबित कर भ्रष्टाचार की जांच हो। नर्सिंग प्रशासन में केवल नर्सिंग पृष्ठभूमि वाले अधिकारी नियुक्त किए जाएं।
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तुम डॉक्टरों के अधीन हो, सिर झुका कर चलो
प्रभारी प्राचार्य शैलेंद्र सिंह के सामने छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि डॉ. आफरीना अक्सर उन्हें अपमानित करती हैं। वह कहती हैं कि तुम डॉक्टरों के गुलाम हो, तुम्हारा कोई सम्मान नहीं।
यह व्यवहार न सिर्फ छात्राओं की आत्म-छवि को चोट पहुंचाता है, बल्कि नर्सिंग जैसे सम्मानित प्रोफेशन को भी नीचा दिखाता है। मानसिक उत्पीड़न से आत्महत्या के विचार तक पहुंचें छात्र-छात्राओं ने खुलकर बताया कि डॉ. अफरीना अपने पद का दुरुपयोग कर उन्हें बार-बार मानसिक रूप से प्रताड़ित करती हैं।
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26 जनवरी को नर्सिंग छात्रा के साथ हुई छेड़खानी, नोडल बोलीं, मामला रफा-दफा करो
हंगामे के दौरान छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि 26 जनवरी को नर्सिंग कॉलेज की छात्रा के साथ मेडिकल कॉलेज के छात्र ने छेड़खानी की थी। जब छात्रा नोडल अधिकारी आफरीना नासिर के पास पहुंची तो उन्होंने कहा कि इस मामले को यहीं दबा दो। अगर तुम शिकायत करोगी तो तुम्हारे साथ बाहर कुछ हो सकता है। छात्रा अपने साथ हुए कृत्य को छुपाए सात माह से बैठी है। उसने प्रभारी प्राचार्य के सामने आरोप लगाया है कि जिस छात्र ने उसके साथ छेड़खानी की थी, वह नोडल अधिकारी की जान-पहचान का है। इसलिए उसे बोलने से रोका गया।


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टीका लगाकर नहीं आओ, यह मंदिर नहीं है
छात्रों ने बताया कि अधिकतर छात्र हिंदू हैं। वह पूजा पाठ भी करते हैं। जब कभी वह टीका लगाकर क्लास में जाते हैं, तो एचओडी सुधा स्वामी उनसे कहती हैं कि यहां टीका लगाकर नहीं आया करो।





हर बात के कहां से लाएं रुपये
छात्र-छात्राओं ने प्रभारी प्राचार्य के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए बताया कि छोटे से छोटे काम के लिए लिपिक रुपये की मांग करते हैं। जब वह असमर्थता जताते हैं तो उन्हें दुत्कार कर भगा दिया जाता है। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि उनकी तबीयत खराब हो जाने पर वह कुछ दिन कॉलेज नहीं आ पाईं तो लिपिक उनसे रुपये मांगे। नहीं देने पर फेल करने की धमकी दी। एक छात्रा ने बताया कि उनके पिता नोडल अधिकारी के पैरों में गिरकर बच्चियों के बारे में उनसे गुहार लगाते रहे, लेकिन वह फिर भी नहीं मानीं। बताया कि लिपिक कह रहा है कि उसे नोडल अधिकारी को रुपये देने पड़ते हैं।
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वर्जन
छात्र-छात्राओं की कक्षाओं में उपस्थिति कम है। कम उपस्थित होने पर भी परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए सभी प्रकार के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
- अरविंद त्रिवेदी, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज





वर्जन

मेरे ऊपर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह निराधार हैं। उन्होंने कभी भी किसी छात्र-छात्राओं को परेशान नहीं किया है।
आफरीना नासिर, नोडल अधिकारी
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