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पांचवें दिन भी बंद रही गल्ला मंडी,नहीं हुई खरीद

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उरई। केंद्र व प्रदेश सरकार के मंडी शुल्क में दोहरी नीति के विरोध में शुक्रवार को जिला मुख्यालय की गल्ला मंडी पांचवें दिन भी बंद रही। गल्ला व्यापारी गेट के पास धरने पर डटे रहे। हड़ताल से किसानों और पल्लेदारों को दिक्कत हो रही है।
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प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर 21 सितंबर से मंडी बंद चल रही हैं। मंडी में खरीद फरोख्त न होने से करोड़ों रुपये का व्यवसाय प्रभावित हुआ है। किसान अपना माल बेचने को लेकर तो पल्लेदार काम न मिलने से परेशान हैं। धरने पर बैठे गल्ला व्यापारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने मंडी के बाहर अनाज की खरीद फरोख्त करने पर मंडी शुल्क माफ कर दिया है। मंडी के अंदर ढाई फीसदी शुल्क लिया जा रहा है। गल्ला मंडी के व्यापारियों ने कहा कि अगर शुल्क समाप्त करना ही है तो सभी का किया जाए, नहीं तो सभी से मंडी शुल्क वसूला जाए। बाहर मंडी शुल्क न लगने से व्यापार प्रभावित हो रहा है। मंडी में किसी भी प्रकार की खरीद फरोख्त नहीं की जा रही है। व्यापार न होने से मंडी परिसर में सन्नाटा है।
शुक्रवार को अरविंद पटैरिया, देवेंद्र बीजापुर, रविंद्र करमेर, आशीष, सुधीर गुप्ता, केदार भारद्वाज, उदय सिंह टिमरों, राकेश गिरथान, देवीदीन, कालूराम राजपूत, शिवराम ममना, विजय पाल, अशोक कुदारी, संतोष,राजकुमार तिवारी आदि रहे।
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