एट (जालौन)। जिले में पिछले 20 दिनों से नहर न आने से एट व डकोर क्षेत्र के किसान परेशान है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही नहर न चालू हुई तो उन्हें निजी खर्च पर फसलों में पानी लगाना पड़ेगा, जिससे उनका अधिक नुकसान होगा।
रबी फसल की बुवाई लगभग पूर्ण हो चुकी है। गेहूं, मटर, चना समेत ज्यादातर फसलों को पहली सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है। किंतु 20 दिन नहरों में पानी नहीं आ रहा है। तापमान भी अधिक है, इससे फसलें सूखने लगी हैं। कीड़े भी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सोमई, गिरथान, ऐंधापुर, चादपुरा, पचोखरा, एट, धंगुवा, अकोढ़ी, सेई, धमसेनी, विरासनी, सेवढी, भिटरा मवई, पिरौना, जखौली, हरदुआ, जमरौही, केलरा, ईगुई, कला, कंकन, खेरा, डकोर, कुसमिलिया, मुहम्मदाबाद आदि के किसान फसल की सिंचाई के लिए भटक रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में नहर ही सिंचाई का एकमात्र साधन हैं, उन क्षेत्रों में नहरों में पानी न आया तो फसलें सूख ही जाएंगी।
जरूरत के समय नहीं में पानी नहीं
धगुंवा कला के किसान रंणजीत पटेल ने कहा कि बुवाई के समय तो फुल गेज से नहर में पानी चल रहा था। अब फसल को पहली सिंचाई की जरूरत है तब पानी नहीं आ रहा है। नहर में पानी न आने से फसल को नुकसान हो रहा है।
पानी न मिला तो सूख जाएगी फसल
सोमई निवासी किसान लतीफ मुहम्मद ने बताया कि गेहूं की बुवाई हुए 20 दिन से ज्यादा हो गए हैं। नहर न आने की वजह से गेहूं की फसल सूख रही है, जल्द ही पानी न मिला तो फसल सूख जाएगी।
निजी संसाधन से सिंचाई से बढ़ेगी लागत
मुहम्मदाबाद के किसान पूरन वर्मा ने बताया कि अर्किल (हरी मटर) की बुवाई की है। नहर में पानी न आने से बोरिंग से चिड़िया बारिश (ड्रिप विधि) कराकर सिंचाई की थी। निजी संसाधनों से सिंचाई से लागत बढ़ जाएगी।
तापमान से गिरवाट नुकसानदेह
कुसमिलया के किसान अरविंद का कहना है कि सर्दी के दिनों में भी इस समय तापमान में गिरवाट से फसलें सूख रही हैं।नहरों में पानी न आने से किसानों को परेशानी का सामना नहीं कराना पड़ रहा है।