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Jalaun News: सुबह चार बजे से नेटवर्क सक्रिय, दो हजार रुपये में कराते सीमा पार

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उरई। लोकेशन माफिया गिरोह के छह शातिरों की गिरफ्तारी के बाद जिले में फैले इस संगठित नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क सुबह चार बजे से सक्रिय हो जाता था। दो हजार रुपये में सीमा पार कराने का काम होता था।
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गिरोह सुनियोजित तरीके से ढाबों, पेट्रोल पंपों और प्रमुख चौराहों पर अपने सदस्यों को तैनात कर अधिकारियों की हर गतिविधि पर नजर रखता था। ओवरलोड वाहनों से जुड़े माफिया को रियल टाइम लोकेशन उपलब्ध कराता था। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया जाएगा।



चार फरवरी को पुलिस ने डकोर निवासी बीडीसी सदस्य मयंक यादव, सुरेंद्र, विशाल व शिवम को राठ रोड स्थित अजनारी रोड के पास गिरफ्तार किया था। आरोप है कि ये लोग व्हाट्सएप ग्रुप और मोबाइल फोन के जरिए परिवहन, खनन और पुलिस विभाग की टीमों की लोकेशन साझा करते थे। इससे ओवरलोड वाहन चेकिंग से बचकर आसानी से जिले की सीमाएं पार कर जाते थे। मंगलवार को रिनियां निवासी दीपक और रगौली निवासी विवेक यादव को भी गिरफ्तार किया गया।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज से लेकर जोल्हूपुर मोड़ तक लोकेशन माफिया सक्रिय रहते हैं। सुबह चार बजे से ही इनके सदस्य कारों से अधिकारियों का पीछा करना शुरू कर देते हैं। लगभग हर एक किलोमीटर पर इनका एक सदस्य तैनात रहता है जो आगे-पीछे की सूचना तुरंत ग्रुप में साझा करता है।

जिले की सीमा पार कराने के लिए प्रति वाहन दो हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। अनुमान है कि दिनभर में करीब तीन हजार तक ओवरलोड वाहन इस नेटवर्क के जरिए जिले की सीमा से पार कराए जाते हैं। यदि इस हिसाब से देखा जाए तो प्रतिदिन लाखों रुपये का अवैध लेन-देन होने की आशंका है।

लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच हो। मोबाइल कॉल डिटेल व डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल की जाए तो केवल छह लोग ही नहीं, बल्कि कई रसूखदार और सफेदपोश चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं। पुलिस की कार्रवाई के बाद गिरोह में खलबली मची है और कई संदिग्ध भूमिगत बताए जा रहे हैं।




वर्जन

गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जो भी लोग इसमें संलिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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- प्रदीप कुमार वर्मा, एएसपी
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