जनपद के छह विकास खंड क्षेत्रों में तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शनिवार
को नाम वापसी की प्रक्रिया सुबह 11 बजे से शुरू हुई। इस दौरान नदीगांव और
कदौरा ब्लाक को छोड़कर कहीं भी प्रत्याशियों ने नाम वापस नहीं लिए। नदीगांव
क्षेत्र से चार प्रत्याशियों ने चुनाव मैदान छोड़ दिया। कदौरा ब्लाक की
प्रमुख केशर देवी ने अपने बेटे के पक्ष में नाम वापस ले लिया। अब छह
ब्लाकों के लिए 14 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। नाम वापस लेने के लिए
सपा के वरिष्ठ नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी। प्रत्याशियों की खूब मान
मनौव्वल की लेकिन आखिरी समय तक वह अपनी रणनीति में सफल नहीं हो
पाए।
हालांकि डकोर, कोंच और जालौन ब्लाक के लिए प्रमुख का निर्वाचन निर्विरोध
कराकर वह खुश हैं। नदीगांव ब्लाक पर सबकी निगाहें टिकी थीं। यहां छह
प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। शनिवार को ब्लाक प्रमुख शांति देवी समेत
संध्या देवी, गायत्री देवी और अंजू ने चुनाव मैदान छोड़ दिया। चार
प्रत्याशियों के नाम वापस लेने के बाद अब डोली
गुर्जर व सावित्री देवी
आमने-सामने हैं। इसी प्रकार कदौरा ब्लाक प्रमुख केशर देवी ने बेटे विजय
कुशवाहा के समर्थन में नामांकन वापस ले लिया। यहां पर चार प्रत्याशियों ने
नामांकन किया था, अब यहां पर सपा जिला उपाध्यक्ष विजय कुशवाहा, नैनकुवंर और
नरेंद्र द्विवेदी चुनाव मैदान में है। महेबा ब्लाक में नीतू चौधरी, गीता
देवी और शांति देवी चुनाव
मैदान में हैं। माधौगढ़ में सपा से अधिकृत
प्रत्याशी सोनिया रोठौर व अकल राजपूत आमने-सामने हैं। रामपुरा से भी किसी
प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया। यहां पर दिनेश धोबी और ममता दोहरे चुनाव
मैदान में है। कुठौंद में चार प्रत्याशियों ने नामांकन किया लेकिन शीतला
देवी और रश्मि देवी का नामांकन निरस्त हो गया। इसके बाद नीलम यादव
व पुष्पा
यादव आमने-सामने है। माधौगढ़ और नदीगांव में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए
गए थे। जिला निर्वाचन अधिकारी रामगणेश ने कहा कि मतदान के समय भी सुरक्षा
के पुख्ता इंतजाम रहेंगे।
माधौगढ़ ब्लाक पर थी सभी की निगाहें
माधौगढ़
विकास खंड क्षेत्र पर सब की निगाहें टिकी हुई थी। नामांकन के दौरान सपा से
अधिकृत प्रत्याशी सोनिया राठौर के समर्थकों ने जमकर गुंडई दिखाई थी।
नामांकन करने पहुंचे अकल राजपूत का नामांकन फाड़ दिया गया और उसके
साथ
धक्का मुक्की करके दहशत फैलाने का काम किया। हालांकि अकल ने बड़ी मुश्किल
से नामांकन दाखिल कर दिया था। इसके बाद से ही चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया
था। माना जा रहा था कि हो सकता है दबाव में वह नाम वापस ले ले, लेकिन ऐसा
हुआ नहीं। सपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने उससे बातचीत की लेकिन कोई फायदा नहीं
हुआ।