उरई। दहेज के लिए बहू को जिंदा जलाकर मारने के 11 वर्ष पुराने मामले में बुधवार को अदालत ने सास को दोषी करार देते हुए सात साल की कैद सुनाई है। साथ ही विभिन्न धाराओं में कुल 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला वर्ष 2015 का है। कानपुर नगर के घाटमपुर थाना क्षेत्र के कटरी गांव निवासी तेज बहादुर सिंह ने कुठौंद थाना में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उन्होंने बेटी मोहिनी की शादी एक मई 2014 को कुठौंद थाना क्षेत्र के शेखपुर बुजुर्ग गांव निवासी रोहित सिंह के साथ की थी। आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही पति रोहित सिंह, सास गीता देवी तथा ननद रागिनी देवी और सोनम देवी दहेज में एक लाख रुपये की मांग को लेकर मोहिनी के साथ मारपीट करते थे। 25 अप्रैल 2015 की शाम करीब चार बजे ससुराल पक्ष ने कथित तौर पर मोहिनी पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। इससे उसकी मौत हो गई।
घटना के अगले दिन 26 अप्रैल 2015 को पुलिस ने पति, सास और दो ननदों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। पुलिस ने 10 जुलाई 2015 को पति और सास के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। ट्रायल के दौरान पति रोहित सिंह की मृत्यु हो गई, जबकि सास गीता देवी के विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई जारी रही।
अपर जिला जज प्रथम सतीश चंद्र द्विवेदी की अदालत में वादी समेत अन्य गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई पूरी हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने गीता देवी को दोषी पाते हुए सात वर्ष की सजा और 11 हजार रुपये जुर्माना लगाया।