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....रुख आंधियों का हमें बदलना ही था

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जालौन के अकबरपुर इटौरा में काव्य पाठ करती कवियत्री रुचि वाजपेयी। - फोटो : ORAI
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उरई। अकबरपुर इटौरा में कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन किया गया। झांसी से आए कवि विवेक बरसैया ने राह दुश्वार थी किंतु चलना ही था, रुख आंधियों का हमें बदलना ही था सुनाकर वाहवाही बटोरीं। कवि राघवेंद्र सेंगर राघव ने कभी तितली की सूरत है कभी फूलों की सूरत है। हमेशा सब ये कहते हैं मोहब्बत खूबसूरत है।
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इससे पहले कवियत्री रुचि वाजपेयी ने सरस्वती वंदना पढ़कर कवि सम्मेलन की शुरुआत की। सम्मेलन को आगे बढ़ाते हुए कवि कृपाराम कृपालु ने सुनाया-लुजियां पूजियां सब हथिया लई, तोऊ खुपड़िया चटकीं है। मां को रोटी कौन खवावे, बात यहीं पे अटकी है। कवि शमसुल हुदा ने पढ़ा- दिल मेरा निशाना बने तकदीर नहीं है तरकश में तेरे ऐसा कोई तीर नही है। कवि अंचल शर्मा ने सुनाया आंखों आंखों में कभी प्यार नहीं होता है, दिल अगर तलबगार नहीं होता है, डूब जाने का इसी में तो मजा है लेकिन इश्क का दरिया कभी पार नही होता है। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ घनश्याम अनुरागी, पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी, व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य डॉ दिलीप सेठ, आयोजक अमित इतिहास ने अतिथियों व कवियों का सम्मानित किया।
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