नोटबंदी के चलते मंदी से कराह रहे बाजार करीब ढाई महीने बाद फिर से गुलजार होने लगे हैं। बैंक व एटीएम से कैश निकासी की लिमिट बढ़ने से लोगों को राहत मिलने के साथ बाजारों में रौनक लौट आई है। दूसरी तरफ इन दिनों सहालग की वजह से बाजारों में खरीदारों की भीड़ हो रही है।
लिमिट बढ़ने के बाद सराफा, कपड़ा, किराना व बर्तन बाजारों में आई तेजी पर जब व्यापारियों से बात उन्होंने स्वीकारा कि नोटबंदी से व्यापार पर ग्रहण सा लग गया था। अब लगातार बढ़ रही लिमिट से व्यापार में तेजी आ रही है। बताते चलें कि 8 नवंबर को ब्लैक मनी पर रोक लगाने के उद्देश्य से बड़े नोट बंद किए गए। हजार व पांच सौ के पुराने नोट बंद होने से एक ओर लोगों को परेशानी हुई तो वहीं, किराना से लेकर कपड़ा, ज्वेलरी का व्यापार प्रभावित हुआ।
सूत्रों की मानें तो नोटबंदी ने व्यापार को खासा प्रभावित किया था, लेकिन अब लगातार बढ़ रही कैश निकासी लिमिट से लोगों को राहत मिली तो वहीं, बाजारो में भी रौनक लौटने लगी है। व्यापारियों का कहना है कि लिमिट बढ़ने से बाजारों का सन्नाटा तो खत्म हुआ।
इसके साथ ही व्यापार में भी 30 से 40 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। लोग अब नगद भुगतान कर सामान खरीद रहे हैं। नोटबंदी से लोग खरीदारी करने में भी संकोच कर रहे थे। अब कैश की लिमिट बढ़ने और सहालग शुरू होेने से बाजारों में भीड़ हो रही है। इससे व्यापार तो चमकने लगा है और व्यापारियों को भी खासी राहत मिली है। व्यापारियों की मानें तो 40 फीसदी कारोबार में बढ़ोत्तरी हुई है।
कपड़ा व्यापारी रामबिहारी गुप्ता कहते हैं कि नोटबंदी ने कपड़ा व्यापार पर ग्रहण सा लगा दिया था। नोटबंदी से जहां लोग रोजमर्रा के खाने, पीनों की चीजों को लेकर परेशान थे, ऐसी स्थिति में कौन नए कपडे़ खरीदेगा। अपनी कैश की लिमिट बढ़ने से व्यापार में तेजी आने लगी है।
ज्वेलर ब्रजकिशोर गुप्ता के अनुसार तो आठ नवंबर से अचानक हुई नोटबंदी की घोषणा ने सोने चांदी के व्यापार को खासा प्रभावित हुआ है। लिमिट कैश के बाद से इस व्यापार में 30 से 40 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं, व्यापारियों को भी सहूलियत मिली है।
जनरल स्टोर व्यापारी उस्मान अंसारी का मानना है कि नोटबंदी ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी थी। इससे व्यापारियों को खासा नुकसान भी झेलना पड़ा। हालांकि नोटबंदी से लोग चेक से भुगतान कर रहे थे। इससे परेशानी हो रही थी, लेकिन अब ग्राहक नगद भुगतान कर रहे हैं।